चुप रहना लाभकारी! मौनी अमावस्या पर जानें 'मौन व्रत' का साइंस 

मौनी अमावस्या में मौन व्रत को सर्वोत्तम तप माना जाता है. यह धार्म के साथ स्वास्थ्य के लिए अच्छा है.

शोर-शराबे से न केवल कान, बल्कि मानसिक स्वास्थ्य भी बिगड़ रहा है. अशांति, तनाव शरीर में रोग ला रहे हैं.

आयुर्वेद के अनुसार, अधिक बोलना 'वात दोष' को बढ़ाता है. इससे मन अशांत होता है और ऊर्जा का क्षय बढ़ता है.

एक स्टडी के अनुसार, रोजाना 2 घंटे मौन रहने से ब्रेन सेल्स अच्छे होते हैं. इससे याददाश्त तेज होती है.

मौन रहने से शरीर में कोर्टिसोल का स्तर गिरता है. यह दिमाग को शांत करता है.

मौन व्रत ब्लड प्रेशर और हृदय गति को नियंत्रित करता है. गुस्से, हार्ट हेल्थ सुधारने बेहतर है.

भगवद्गीता में मौन को 'गुह्य ज्ञान' और मानसिक तप कहा गया है.

यह वाणी के संयम से ओजस की रक्षा करता है और शरीर को मजबूत बनाता है.

शोर-शराबे से दूर रहने पर नींद की गुणवत्ता सुधरती है. मौन से एकाग्रता और क्रिएटिविटी बढ़ती है.

मौन केवल बाहरी शोर की अनुपस्थिति नहीं, बल्कि एक सक्रिय चेतना है.

यह हमें बाहरी दुनिया से हटाकर आंतरिक शांति की ओर ले जाता है.

इस मौनी अमावस्या पर कुछ देर का मौन व्रत जरूर रखें. यह दिमाग को डिटॉक्स करने में मदद करेगा.