आपके खून और दिमाग में जम रहा है प्लास्टिक, इन उपायों से पाएं छुटकारा
एक्सपर्ट्स का कहना है कि वह अब हमारे खून, फेफड़ों और यहाँ तक कि दिमाग तक पहुंच चुका है.
वैज्ञानिक बताते हैं कि हमारे मस्तिष्क में करीब 5 ग्राम तक माइक्रोप्लास्टिक जमा हो सकता है.
माइक्रोप्लास्टिक के संपर्क में आने से हमारी पाचन शक्ति को नियंत्रित करने वाले बैक्टीरिया तेज़ी से बदलने लगे.
ये बदलाव कुछ वैसे ही दिखते हैं, जैसे डिप्रेशन और कोलन कैंसर से जुड़े पैटर्न में देखे जाते हैं.
माइक्रोप्लास्टिक्स प्लेसेंटा और ब्रेन बैरियर जैसी शरीर की सबसे संवेदनशील झिल्लियों को भी पार कर जाते हैं.
अब सवाल यह है कि अगर वे अंदर पहुंच चुके हैं, तो क्या वे हमारे मूड को भी प्रभावित कर रहे हैं?
प्लास्टिक जहरीले रसायनों का कॉकटेल है, जो हमारे शरीर के अच्छे रसायन के उत्पादन को कम कर सकता है.
जब हम चौतरफा प्लास्टिक से घिरे हैं, तो इससे बचने के लिए जीवन में छोटे-छोटे बदलाव करने होंगे.
प्लास्टिक के बर्तन में खाना गर्म करने से बचें. सब्जी काटने के लिए लकड़ी का चॉपिंग बोर्ड लें, प्लास्टिक का नहीं.
चाय या पानी के लिए स्टेनलेस स्टील या सेरामिक के कप/मग का उपयोग करें. टी बैग्स वाली चाय पीने से बचें.
तकिया, मैट्रस और बेडशीट प्लास्टिक के कण से बने न हों. नेचुरल फैब्रिक का इस्तेमाल करें.
फेस वॉश, लिपस्टिक, लोशन आदि के लेबल पर पॉलीइथाइलीन जैसे प्लास्टिक नामों की जांच करें और उनसे बचें.