Mughal Emperor Humanyu:भाईचारे की जंग, साजिशें और सत्ता के लिए खूनी संघर्ष
हुमांयू की गैरमौजूदगी में कामरान ने काबुल दुर्ग पर कब्जा कर लिया और पूरा परिवार, यहां तक कि छोटे अकबर को भी कैद कर लिया.
हुमांयू चाहता था कि कामरान हिंदुस्तान फतह में उसका साथ दे, लेकिन भाई के विद्रोह ने उसे क्रोधित कर दिया.
काबुल और कंधार पर कब्जे के लिए दोनों भाइयों के बीच कई युद्ध हुए, लेकिन कामरान बार-बार विद्रोह करता रहा.
1551 में लड़ाई के दौरान हुमांयू का छोटा भाई मिर्जा हिंदाल अफगानों द्वारा मार दिया गया. गुलबदन बेगम ने लिखा—इसके बाद कामरान के जीवन में दुर्भाग्य छा गया
कामरान ने हुमांयू से समझौते की कोशिश की, लेकिन जब बात नहीं बनी तो दोनों के बीच फिर युद्ध छिड़ गया.
युद्ध हारने के बाद कामरान सिर मुंडवाकर दरवेश के वेश में भाग गया और अफगानों की शरण में चला गया.
नवंबर 1553 में गखर शासक गुलाम आदम ने कामरान को पकड़कर हुमांयू के हवाले कर दिया.
हुमांयू के दरबारियों ने कहा—कामरान को मार डालो, अल्लाह खुश होगा. लेकिन हुमांयू ने उसकी जान बख्श दी.
हुमांयू ने सिर्फ उसकी आंखें फुड़वा दीं और उसे मक्का भेज दिया. दर्द से कराहते हुए कामरान ने कहा— "अब मुझे मक्का भेज दो."