पपीते में कील ठोकने से आएंगे ढेरों फल? जानें सच या सिर्फ अफवाह
घर में लगे पपीते पर फल न आने पर लोग तने में लोहे की कील ठोकने का देशी उपाय अपनाते हैं. माना जाता है कि इससे पौधा शॉक में आकर तेजी से फल देने लगता है.
ग्रामीण मान्यताओं के अनुसार हल्का तनाव मिलने पर पौधा प्रजाति बढ़ाने के लिए फल-फूल की प्रक्रिया तेज करता है. कुछ लोग इसे आयरन (लोहा) पाने का जरिया भी मानते हैं.
कृषि वैज्ञानिकों के मुताबिक इस तरीके का कोई वैज्ञानिक प्रमाण (Scientific Proof) नहीं है. पौधे में फल आना उसकी किस्म, सही पोषण, धूप और पानी पर निर्भर करता है.
तने में कील ठोकने से पौधे के अंदरूनी ऊतक (tissues) में गहरा घाव बन जाता है, जो पौधे के स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकता है.
तने में बने घाव के जरिए हानिकारक फंगस और बैक्टीरिया आसानी से प्रवेश कर जाते हैं, जिससे तना गलने का खतरा बढ़ जाता है.
सही देखभाल न मिलने और इंफेक्शन फैलने की वजह से पौधे का विकास रुक जाता है और हरा-भरा पौधा सूख कर सड़ सकता है.
पपीते के पौधे को फल देने के लिए रोजाना कम से कम 6 से 8 घंटे की सीधी धूप मिलना बेहद जरूरी है.
फल-फूल लाने के लिए तने में कील ठोकने के बजाय समय-समय पर गोबर की खाद, वर्मीकंपोस्ट और पोटाश (Potash) का इस्तेमाल करें.
फल न आने की झंझट से बचने के लिए शुरुआत में ही उत्तम किस्म या हाइब्रिड बीजों/पौधों का चुनाव करें, जो तेजी से फल देते हैं.