पद्मश्री या पद्मभूषण नहीं, पहले इन नामों से जाने जाते थे ये पुरस्कार, क्या आप जानते हैं?
गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर केंद्र सरकार ने 2025 के लिए पद्म पुरस्कारों की घोषणा कर दी है. केंद्र सरकार ने पद्म पुरस्कारों के लिए कई नामों का ऐलान किया है.
इसमें भक्ति गायक भेरू सिंह चौहान, भीम सिंह भावेश, एथलीट हरविंदर सिंह, डॉ. नीरजा भटला व कुवैत की योगा ट्रेनर शेखा एजे अल सबहा जैसे नाम शामिल हैं.
देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान में से एक पद्म पुरस्कार तीन श्रेणियों में दिए जाते हैं. इसमें पद्म विभूषण, पद्म भूषण और पद्मश्री शामिल हैं.
क्या आपको पता है कि भारत सरकार की ओर से दिए जाने वाले पद्म विभूषण, पद्म भूषण और पद्म श्री का नाम पहले यह नहीं था. इस अवॉर्ड को दूसरे नामों से दिया जाता था. चलिए जानते हैं इसकी कहानी...
पद्म पुरस्कार देने की शुरुआत भारत रत्न के साथ ही हुई. भारत सरकार ने देश की आजादी के बाद 1954 में भारत रत्न और पद्म विभूषण सम्मान देने का फैसला किया था.
तब से लेकर आज तक यह अवॉर्ड अलग-अलग क्षेत्रों में उत्कृष्ट और असाधारण सेवा के लिए प्रदान किए जाते हैं.
यह अवॉर्ड, कला, सामाजिक कार्य, विज्ञान, इंजीनियरिंग, व्यापार, उद्योग, चिकित्सा, साहित्य, खेल जैसे अलग-अलग क्षेत्रों में असाधारण काम करने वाले व्यक्तियों को दिए जाते हैं.
हर साल गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर इनकी घोषणा होती है, इसके बाद मार्च-अप्रैल में राष्ट्रपति भवन में एक समारोह में यह सम्मान विजेताओं को दिया जाता है.
1954 में भारत रत्न के साथ पद्म पुरस्कारों की जब घोषणा हुई थी, तब सिर्फ पद्म विभूषण ही दिया जाता था. इसकी तीन कैटगरी थीं, जिसमें-प्रथम वर्ग, द्वितीय वर्ग और तृतीय वर्ग था.
हालांकि, यह नाम सिर्फ एक साल ही चला. 8 जनवरी, 1955 में राष्ट्रपति भवन द्वारा जारी अधिसूचना में इन पुरस्कारों का नाम बदलकर पद्म विभूषण, पद्म भूषण और पद्म श्री कर दिया गया था.
पद्म पुरस्कार किसी एक व्यक्ति को लगातार दो या तीन साल तक नहीं दिए जा सकते. इसके लिए नियम है.
आसान भाषा में कहें तो अगर किसी व्यक्ति को इस साल पद्मश्री से सम्मानित किया गया है तो इसके पांच साल बाद ही उसे पद्म भूषण या पद्म विभूषण से सम्मानित किया जा सकता है.