जानें पिंकी प्रॉमिस के पीछे क्या है अंगुली काटने की कहानी
आपने भी कभी न कभी किसी से पिंकी प्रॉमिस तो किया ही होगा. यानी ऐसा वादा जो हर हाल में पूरा किया जाएगा. लेकिन क्या आप जानते हैं कि इस प्यारी सी परंपरा की शुरुआत कहां से हुई?
दरअसल, पिंकी प्रॉमिस का चलन शुरू हुआ था जापान से. वहां हाथ की सबसे छोटी उंगली को कहा जाता है पिंकी फिंगर और इसी से जुड़ा है ये दिलचस्प किस्सा.
सन 1600 से 1800 के बीच जापान में पिंकी प्रॉमिस बेहद लोकप्रिय हुआ. ये सिर्फ एक वादा नहीं, बल्कि जान की बाजी लगाने वाला संकल्प माना जाता था.
जापान में माना जाता था कि अगर कोई व्यक्ति अपना पिंकी प्रॉमिस तोड़ देता है, तो उसे अपनी छोटी उंगली काटनी पड़ती थी! यही वजह थी कि लोग इस वादे को बहुत गंभीरता से लेते थे.
वादा करते समय दोनों लोग अपनी छोटी उंगली एक-दूसरे से क्रॉस करते थे, ताकि ये साबित हो सके कि वादा दिल से किया जा रहा है.
धीरे-धीरे ये परंपरा दुनिया के बाकी देशों में भी फैल गई और पिंकी प्रॉमिस प्यार, दोस्ती और भरोसे का प्रतीक बन गया.
समय के साथ लोग वादा तोड़ने पर उंगली काटना तो छोड़ चुके हैं, लेकिन ‘पिंकी प्रॉमिस’ आज भी रिश्तों में सच्चाई और ईमानदारी का प्रतीक बना हुआ है.
आज पिंकी प्रॉमिस सिर्फ दोस्तों या पार्टनर्स के बीच ही नहीं, बल्कि सोशल मीडिया ट्रेंड और क्यूट जेस्चर के तौर पर भी फेमस हो चुका है.
तो अगली बार जब आप किसी से पिंकी प्रॉमिस करें, याद रखें ये सिर्फ मज़ाक नहीं, बल्कि एक ऐतिहासिक और भरोसेमंद परंपरा की निशानी है.