सरिस्का में चमत्कार; पहली बार दिखे सफेद मोर और 'सोने' का सांभर

राजस्थान का सरिस्का टाइगर रिजर्व इन दिनों वन्यजीव प्रेमियों के लिए कौतूहल का केंद्र बना हुआ है, जहां दो बेहद दुर्लभ जीव दिखाई दिए हैं.

इतिहास में पहली बार यहां एक खूबसूरत दूधिया 'सफेद रंग का मोर' देखा गया है. राजस्थान के किसी प्राकृतिक जंगल में ऐसा मोर पहले कभी नहीं मिला.

सफेद मोर के साथ ही जंगल में सोने की तरह चमकने वाला दुर्लभ 'गोल्डन सांभर' भी घूमता हुआ दिखाई दिया है.

वाइल्डलाइफ एक्सपर्ट्स के मुताबिक, जब इस खास सांभर के शरीर पर सूरज की किरणें पड़ती हैं, तो इसका बदन बिल्कुल सोने की तरह चमक उठता है.

एक्सपर्ट्स के अनुसार, जीवों के रंग में यह अनोखा बदलाव 'जीनेटिक म्यूटेशन' (हार्मोन्स में गड़बड़ी या पिगमेंटेशन) के कारण हो सकता है.

साल 2005 में पूरी तरह 'टाइगर विहीन' हो चुके सरिस्का में वन विभाग के प्रयासों से आज बाघों की संख्या बढ़कर 56 हो गई है.

पिछले 2 साल में यहां 25 स्वस्थ शावकों का जन्म हुआ है. उम्मीद है कि साल 2026 के खत्म होने तक यहां 60 से ज्यादा बाघ हो जाएंगे.

सरिस्का सिर्फ बाघों के लिए नहीं, बल्कि तेंदुओं, चीतल, नीलगाय और सर्दियों में आने वाले विदेशी साइबेरियन पक्षियों का भी पसंदीदा घर है.

भारत के राष्ट्रीय पक्षी मोर का इतिहास द्वापर युग से जुड़ा है. देश में अभी लाखों नीले मोर हैं, लेकिन अब धीरे-धीरे इनकी तादाद कम हो रही है.