सावन में क्यों जरूरी है शिव जी के साथ शनिदेव की पूजा? जानिए शिव-शनि का पावन संबंध

सावन का पहला शनिवार भगवान शिव और शनिदेव दोनों की पूजा के लिए खास होता है।

भगवान शिव ही शनिदेव के गुरु माने जाते हैं। उन्होंने ही उन्हें न्यायाधीश का पद सौंपा था।

शिव और शनि की एक साथ पूजा करने से शनि दोष से मुक्ति मिलती है और शुभ फल प्राप्त होते हैं।

शनिवार को शिव के अवतार हनुमान जी की पूजा से भी शनि की कृपा मिलती है।

हनुमान जी की आराधना से शरीर बलवान, रोगमुक्त और बुद्धिशाली होता है।

शनि की प्रसन्नता के लिए ब्राह्मण को तिल का तेल लगाकर स्नान कराएं और खिचड़ी खिलाएं।

शनिवार को शनिदेव का तिल के तेल से अभिषेक करें और काला तिल-उड़द चढ़ाएं।

शनि पूजा में वैदिक मंत्रों का जाप जरूर करें, जैसे- “शन्नो देवीरभिष्टय” और “ॐ शनैश्चराय नमः”

शिव और शनिदेव दोनों की आराधना से जीवन के कष्ट दूर होते हैं और सफलता का मार्ग खुलता है।