लीप ईयर vs अधिकमास: 29 फरवरी और 'मलमास' में क्या है अंतर?

अंग्रेजी कैलेंडर का लीप ईयर और हिंदू पंचांग का अधिकमास दोनों समय को संतुलित करते हैं, लेकिन इनका आधार और महत्व बिल्कुल अलग है.

दुनिया में समय दो तरह से नपता है: सूर्य आधारित (Solar Calendar) जिससे लीप ईयर बनता है और चंद्रमा आधारित जिससे अधिकमास बनता है.

पृथ्वी सूर्य का चक्कर 365 दिन 6 घंटे में पूरा करती है. हर 4 साल में इन अतिरिक्त घंटों को जोड़कर 29 फरवरी का दिन बनता है.

चंद्र वर्ष सौर वर्ष से लगभग 11 दिन छोटा होता है. इस अंतर को संतुलित करने के लिए हिंदू पंचांग में एक अतिरिक्त महीना जोड़ा जाता है.

लीप ईयर में हर 4 साल में 1 दिन जुड़ता है, जबकि अधिकमास में लगभग हर 32 महीने (ढाई साल) के बाद एक पूरा महीना जुड़ जाता है.

लीप ईयर का कोई धार्मिक महत्व नहीं है, यह सिर्फ गणित है. वहीं, अधिकमास को 'मलमास' और 'पुरुषोत्तम मास' भी कहा जाता है.

इसे मलमास कहते हैं क्योंकि इसमें शादी, मुंडन जैसे शुभ काम वर्जित होते हैं. लेकिन भगवान विष्णु की भक्ति के लिए यह सर्वश्रेष्ठ (पुरुषोत्तम) है.

अधिकमास में सूर्य किसी राशि में प्रवेश नहीं करता (मलिन मास), इसलिए इस दौरान मांगलिक कार्य नहीं किए जाते, सिर्फ पूजा-पाठ होता है.

लीप ईयर कैलेंडर की तारीखों को मौसम के साथ रखता है. अधिकमास त्योहारों (जैसे दिवाली, होली) को सही मौसम में बनाए रखता है.

तो सरल शब्दों में, लीप ईयर 'दिन' का एडजस्टमेंट है और अधिकमास 'महीने' का. दोनों ही प्रकृति और समय का अद्भुत तालमेल हैं.