एक ऐसा अनोखा मंदिर जहां बिना सूंड वाले गणेश जी है विराजमान, 300 साल पुराना है इतिहास
भारत में गणेश चतुर्थी बड़े धूमधाम से मनाई जाती है. बप्पा को विघ्नहर्ता और मंगलकर्ता माना जाता है, इसलिए हर शुभ काम उनसे शुरू होता है.
लेकिन जयपुर में स्थित एक ऐसा अनोखा मंदिर है जहां भगवान गणेश बाल स्वरूप में विराजमान हैं.यानी बिना सूंड वाले गणेश जी की पूजा यहां होती है.
यहां गणेश जी को ‘पुरुषकृति’ रूप में माना जाता है. भक्त मानते हैं कि यह स्वरूप सौभाग्य और आशीर्वाद लाता है.
गढ़ गणेश मंदिर करीब 300 साल पुराना है.इसे जयपुर के संस्थापक महाराजा सवाई जयसिंह द्वितीय ने बनवाया था.
कहा जाता है कि जब राजा ने अश्वमेध यज्ञ किया, तभी मंदिर की नींव रखी गई. मूर्ति इस तरह रखी गई कि सिटी पैलेस से दूरबीन से भी दिख सके.
मंदिर में दो बड़े मूषक बने हैं. भक्त अपनी परेशानियां इनके कान में बताते हैं और मानते हैं कि यह बातें सीधे गणेश जी तक पहुंचती हैं.
यहां भक्त अपनी इच्छाएं और निमंत्रण पत्र लिखकर भेजते हैं. शादी हो, बच्चा जन्मे या नई नौकरी मिले – सबसे पहले गणेश जी को बुलावा भेजा जाता है.
मंदिर के पते पर रोजाना सैकड़ों पत्र आते हैं. भक्तों का विश्वास है कि बप्पा हर संदेश पढ़ते हैं और मनोकामना पूरी करते हैं.
मंदिर तक पहुंचने के लिए 365 सीढ़ियां चढ़नी पड़ती हैं. ये साल के 365 दिनों का प्रतीक मानी जाती हैं.
ऊपर पहुंचकर जयपुर शहर का शानदार दृश्य दिखता है. शाम के समय यहां से सूरज ढलने का नजारा बेहद खूबसूरत लगता है. गढ़ गणेश मंदिर का वातावरण बहुत शांत और दिव्य है.