मास्टर फॉर्मूला: आलू की पैदावार होगी दोगुनी, जानें एकदम आसान उपाय
आलू की खेती में सिर्फ खाद और सिंचाई काफी नहीं. मिट्टी चढ़ाना उत्पादन बढ़ाने का सबसे असरदार तरीका माना जाता है.
जब पौधे 15–22 सेमी ऊंचाई पर पहुंच जाएं, तभी पहली बार मिट्टी चढ़ाएं. जरूरत पड़े तो 15 दिन बाद दोबारा करें.
मिट्टी हल्की और हल्की नमी वाली हो. बहुत गीली या ज्यादा सख्त मिट्टी कंद सड़ा सकती है.
मिट्टी तनों के चारों ओर सावधानी से चढ़ाएं. कुदाल/हल चलाते समय पौधे को नुकसान न पहुंचे.
मिट्टी चढ़ाने से कंद धूप से नहीं झुलसते. धूप में पड़े आलू हरे पड़ जाते हैं-जो खाने योग्य नहीं होते.
यह तकनीक कंदों का आकार और वजन बढ़ाती है. किसानों को ज्यादा उपज + बेहतर बाजार मूल्य मिलता है.
मिट्टी चढ़ाने से पौधे गिरते नहीं, जड़ें मजबूत रहती हैं, और खेत में खरपतवार भी कम उगते हैं.
यह मिट्टी तकनीक खेत की नमी को लंबे समय तक बनाए रखती है, जिससे गर्मी-सर्दी का प्रभाव कम पड़ता है.
कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार. मिट्टी सही समय पर चढ़ाने वाले किसानों को 15–25% अधिक पैदावार मिलती है.