हर साल 16 जुलाई को विश्व सांप दिवस मनाया जाता है ताकि सांपों के प्रति जागरूकता बढ़ाई जा सके और उनकी भूमिका को समझाया जा सके.
पारिस्थितिक तंत्र में सांपों की महत्वपूर्ण भूमिका है, जो शिकार की आबादी को नियंत्रित करने और जैविक संतुलन बनाए रखने में मदद करते हैं.
दुनिया भर में सांपों की 3,500 से अधिक प्रजातियां पाई जाती हैं, जिनमें से करीब 300 भारत में हैं.
कुल सांपों में से करीब 600 प्रजातियां ही जहरीली होती हैं और उनमें से भी केवल 200 प्रजातियां ही इंसानों के लिए खतरा हैं.
सांपों का जहर चिकित्सा क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, खासकर कई प्रकार की गंभीर बीमारियों के इलाज में इसका उपयोग होता है.
सोच सांपों को लेकर कई तरह की भ्रांतियां हैं, जिसके कारण हमारे समाज में सांपों को गलत ढंग से देखा जाता है.
वर्ल्ड स्नेक डे की शुरुआत 1970 में हुई थी, जब टेक्सास में सांपों के लिए एक फर्म ने लोगों को सांपों के प्रति जागरूक करने का काम किया.
सांपों के संरक्षण के लिए जागरूकता बढ़ाना और उनके महत्व को समझाना आवश्यक है. इससे प्रकृति की रक्षा होगी.
सांप पारिस्थितिकी तंत्र के संतुलन को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं. उनके कारण फसल की उपज में बढ़त होती है.
सांपों के प्रति जागरूकता और शिक्षा के माध्यम से हम उनकी महत्वपूर्ण भूमिका को समझ सकते हैं और उनके संरक्षण में योगदान कर सकते हैं.