थम जाएगा बुढ़ापा! दिल-दिमाग रहेंगे जवान, जानें स्वर्ण भस्म का उपयोग
आयुर्वेद में स्वर्ण भस्म का इस्तेमाल सदियों से गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए होता आया है. यह बुढ़ापे भगाने का काम करता है.
चरक संहिता और सुश्रुत संहिता में इसका वर्णन है. भारत ही नहीं, चीन और मिस्र में भी धातु भस्म से उपचार बताया गया है.
स्वर्ण भस्म दिल की बीमारियों से दूर रखती है. अगर दिल को जवान रखना है तो सोने के कणों से बनी यह भस्म बेहद कारगर है.
सोने के कण शरीर की कोशिकाओं को एक्टिव करते हैं. यह इम्यून सिस्टम मजबूत करती है.
अगर दवा लेने पर भी हीमोग्लोबिन नहीं बढ़ता, तो स्वर्ण भस्म लें. यह RBC को बनाने और ऑक्सीजन पहुंचाने में मदद करती है.
आयुर्वेद इसे मानसिक रोगों की बेहतरीन दवा मानता है. अगर तनाव है या बिना वजह मन उदास रहता है, तो इसका सेवन उपयोगी है.
इसमें मौजूद एंटीऑक्सीडेंट्स शरीर को फ्री रेडिकल्स से बचाते हैं, जिससे चेहरे पर चमक बनी रहती है.
शास्त्रों में इसे क्षय रोग (TB), खांसी, बांझपन और मांसपेशियों की कमजोरी दूर करने के लिए भी उपयोगी बताया गया है.
यह शुद्ध सोने के कणों के कई बार शोधन के बाद तैयार होती है, इसलिए सोने की कीमत के साथ यह भी महंगी होती है.
गर्भवती महिलाएं और बच्चे बिना डॉक्टर की सलाह के इसे न लें. बीमारी के हिसाब से इसकी मात्रा अलग होती है.