मेघालय का वो गांव जहां पेड़ बनाते हैं पुल वो भी असली जड़ से बना पुल

आपने सीमेंट के पुल तो बहुत देखे होंगे, लेकिन क्या कभी पेड़ों की जड़ों से बना ‘ज़िंदा पुल’ देखा है?

ये करिश्मा होता है Meghalaya के गहरे जंगलों में  Nongriat और Cherrapunji जैसे इलाकों में,जहाँ बरगद जैसे पेड़ अपनी जड़ें नदी के पार फैला देते हैं.

इन जड़ों को गाँव के लोग पीढ़ी-दर-पीढ़ी संभालते हैं, धीरे-धीरे वो इतनी लंबी और मज़बूत हो जाती हैं कि पूरा गाँव उन पर चलकर नदी पार करता है.

यहाँ का सबसे प्रसिद्ध पुल है, Double Decker Root Bridge, यानी दो मंज़िला पेड़ का पुल

Living Roots Bridges मेघालय के लोगों की प्रकृति से दोस्ती, धैर्य और लोककला का प्रतीक हैं.

Meghalaya कि सरकार,  Living Roots Bridge को संरक्षित करने और UNESCO World Heritage Tag दिलवाने के लिए लगातार प्रयास कर रही है.

साथ ही 70 करोड़ की राशि भी आयुक्त  की गई है, जिससे Living Roots Bridge Experience Centre और Wakhen Residential Music Retreat को  बनाया जा बना रहा है.

यह केंद्र, पर्यटको के लिये एक अमूल्य अनुभव होगा और Living Roots Bridges कि संस्कृति, इतिहास, तकनीक और विभिन्न स्थानों के बारे में जानने का माध्यम बनेगा.

 ये जड़ के पुल हमें सिखाते हैं कि प्रकृति को साथ लेकर चलो तो रास्ते अपने-आप बन जाते हैं.यह औद्योगिक machinery का फल नहीं, बल्कि स्वदेशी ज्ञान और पारंपरिक कौशल का एक अनमोल रत्न है.