औषधीय और सुगंधित फसलों की खेती करने वाले किसानों के लिए एक बड़ी खुशखबरी है.

तुलसी की एक नई और उन्नत किस्म 'वल्लभ नव्या तुलसी-1' सामने आई है, जो मुनाफे के नए दरवाजे खोलेगी.

किसानों की आय बढ़ाने के लिए इसे गुजरात स्थित आईसीएआर द्वारा विकसित किया गया है.

उत्पादन के लिहाज से यह किस्म बेहद खास है. इसमें 23.10 प्रतिशत सूखी पत्ती की रिकवरी दर्ज की गई है.

इस तुलसी की पत्तियों में 0.73 प्रतिशत एसेंशियल ऑयल पाया जाता है.

इसके प्रति 0.5 वर्ग मिमी क्षेत्र में लगभग 7 तेल ग्रंथियां (Glands) मौजूद हैं.

इसके तेल में 82.81 प्रतिशत 'मिथाइल यूजेनॉल' पाया जाता है. यह औषधीय दृष्टि से महत्वपूर्ण तत्व है.

अपनी उच्च चिकित्सीय उपयोगिता के कारण 'वल्लभ नव्या तुलसी-1' की मांग दवा उद्योग में सबसे ज्यादा रहने वाली है.

यह किस्म पर्यावरण के अनुकूल भी है. इसे खतरनाक व्हाइटफ्लाई के लिए एक 'ट्रैप क्रॉप' के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है.

जब मुख्य फसल पर कीटों का दबाव कम होगा, तो किसानों को कीटनाशकों का उपयोग कम करना पड़ेगा.

सबसे अच्छी बात यह है कि वल्लभ नव्या तुलसी-1 भारत के सभी क्षेत्रों के लिए पूरी तरह से उपयुक्त है.

यह किस्म किसानों को कम लागत में अधिक उत्पादन और बेहतर गुणवत्ता देने का पक्का समाधान है.