रोज सुबह 3 से 5 बजे के बीच खुल जाती है नींद! किस खतरे का है अलार्म?

अलार्म बजने से पहले ही अचानक नींद खुल जाना दिमाग के अंदर की बेचैनी का संकेत है. आपका शरीर आपको कोई जरूरी संदेश दे रहा है.

हमारे अंदर एक सटीक 24 घंटे का चक्र चलता है, जिसे सर्कैडियन रिदम कहते हैं. यह नींद से लेकर हार्मोन रिलीज तक सब नियंत्रित करता है.

सुबह 2 से 5 बजे के बीच कोर्टिसोल हार्मोन धीरे-धीरे बढ़ना शुरू करता है. लेकिन तनाव अधिक होने पर, यह धीमी आवाज़ में उठाने की बजाय झटका देकर नींद से बाहर खींच लेता है.

लगातार तनाव नींद की संरचना को बिगाड़ देता है. शरीर रात भर हाई अलर्ट पर बना रहता है, जिससे नींद गहरी होने की बजाय बीच में ही टूट जाती है.

REM नींद में दिमाग सबसे ज्यादा सक्रिय होता है. तनावग्रस्त लोग अक्सर सुबह-सुबह इसी चरण से जागते हैं, क्योंकि अधूरे विचार प्रोसेस हो रहे होते हैं.

रोज 3 से 5 बजे के बीच जागना आपकी प्राकृतिक नींद-जागने की घड़ी (क्रोनोटाइप) का संकेत हो सकता है. कुछ लोग सुबह उठने के लिए, तो कुछ देर रात के लिए बने हैं.

आज की 9 से 5 वाली लाइफस्टाइल अक्सर इस जैविक घड़ी से टकराती है, जिसे "सोशल जेट लैग" कहते हैं, जो तनाव और असंतुलन पैदा करता है.

रात में स्क्रीन टाइम कम करें. फोन, टीवी या लैपटॉप की नीली रोशनी आपकी बॉडी क्लॉक को भ्रमित करती है और नींद के हार्मोन (मेलाटोनिन) को रोकती है.

तनाव को दिनभर ही मैनेज करें. गहरी सांस लेना, टहलना या अपनी भावनाएं लिखना मदद कर सकता है. सोने से पहले कैफीन और शराब से बचें.

अपनी नींद का पैटर्न डायरी या ऐप में नोट करें. छोटे बदलाव और अपने क्रोनोटाइप के हिसाब से दिनचर्या बनाने से बेहतर नींद संभव है.