आख़िर कौन है ? जग्गी वासुदेव जानिए इनके जीवन के बारे में
जग्गी वासुदेव जिन्हें सद्गुरु के नाम से भी जाना जाता है एक भारतीय आध्यात्मिक गुरु हैं इनके सोच, विचार और व्यक्तित्व लाखों लोगों के भटके जीवन को सकारात्मक दिशा देते हैं.
सद्गुरु जग्गी वासुदेव का जन्म 03 सितंबर 1957 को कर्नाटक के मैसूर में एक संपन्न तेलुगु परिवार में हुआ. इनका पूरा नाम जगदीश ‘जग्गी’ वासुदेव है.
सद्गुरु ने विज्जी नाम की महिला के साथ शादी की और वैवाहिक जीवन की शुरुआत की विवाह के छह साल बाद 1990 में उनकी एक बेटी हुई.
जग्गी वासुदेव जब 25 साल के थे तब एक दिन चामुंडी हिल गए जोकि मैसूर में ही है यहां पर्वत के ऊंचे पत्थर पर वे बैठे हुए थे और बैठते हुए धीरे-धीरे वे ध्यान में चले गए.
इस दौरान उन्हें ऐसा प्रतीत हुआ कि वह प्रकृति के साथ मिल चुके हैं यह उनके जीवन का ऐसा अनुभव था जिसने उनकी पूरी जिंदगी बदल दी 1997 में विज्जी ने महासमाधि लेकर दुनिया को अलविदा कह दिया.
सद्गुरु द्वारा स्थापित ईशा फाउंडेशन एक लाभ रहित मानव सेवा संस्थान है जो लोगों की शारीरिक मानसिक और आन्तरिक कुशलता के लिए समर्पित है
ईशा योग केंद्र, ईशा-फाउन्डेशन के संरक्षण तले स्थापित है. यह वेलिंगिरि पर्वतों की तराई में 150 एकड़ की हरी-भरी भूमि पर स्थित है. घने वनों से घिरा ईशा योग केंद्र नीलगिरि जीवमंडल का एक हिस्सा है जहाँ भरपूर वन्य जीवन मौजूद है.
वासुदेव पर अंधविश्वास को बढ़ावा देने और विज्ञान को गलत तरीके से पेश करने का भी आरोप लगाया गया है इसके अलावा, वासुदेव पर हिंदुत्व के एक सुनहरे हिंदू अतीत के संशोधनवादी इतिहास को लोकप्रिय बनाने का आरोप लगाया गया है.
जग्गी वासुदेव संयुक्त राष्ट्र आर्थिक और सामाजिक परिषद (अंग्रेजी: ECOSOC) में विशेष सलाहकार की पदवी प्राप्त है।भारत सरकार द्वारा उन्हें सामाजिक सेवा के लिए पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया है