कौन था मुगलों का डॉक्टर, किनसे होता था उनका इलाज?

मुगलों के दरबार के हकीमों से लेकर विदेशी डॉक्टर्स की एंट्री तक की दिलचस्प कहानी है.

आगरा और दिल्ली की गर्मी से परेशान मुगल सेना बीमार पड़ने लगी. सैनिक काबुल लौटना चाहते थे.

बाबर ने ठान लिया कि अब हिन्दुस्तान में ही राज करेगा. हकीमों ने स्वास्थ्य सुधारकर इस नींव को मजबूत बनाया.

मुगलों के दौर में यूनानी चिकित्सा पद्धति का खूब विकास हुआ. इलाज जड़ी-बूटियों और खनिज दवाओं से किया जाता था.

हकीम हुमाम अकबर के निजी चिकित्सक थे. उनका नाम मुगल इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में दर्ज है.

जहांगीर के चिकित्सक मुकर्रब खान,जहांगीर के निजी हकीम और मित्र थे जो कि मुगल दरबार में चिकित्सा और दोस्ती का अनोखा संगम था.

शाहजहां के दौर में विदेशी चिकित्सकों की एंट्री शुरू हुई. पुर्तगाली, डच और अंग्रेज डॉक्टर्स सल्तनत से जुड़े.

फ्रांस्वा बर्नियर (1658) फ्रांसीसी चिकित्सक जो दारा शिकोह के दोस्त बने. जिन्होनें अपनी किताब Travels in the Mughal India में हरम और औरंगजेब के किस्से दर्ज किए.

ईस्ट इंडिया कंपनी का सर्जन गैब्रियल बॉटन ईस्ट इंडिया कंपनी के जहाज़ से हिन्दुस्तान पहुंचे जिसने बुरी तरह से जल चुकी शहजादी जहांआरा की जान बचाई.इससे अंग्रेजों का व्यापारिक रास्ता और खुल गया.