छींकते वक्त आंखें क्यों बंद हो जाती हैं? असली वजह जानकर हैरान रह जाएंगे
क्या आपने ध्यान दिया है कि जब भी आप छींकते हैं, आपकी आंखें अपने-आप बंद हो जाती हैं? ये सिर्फ आदत नहीं है, बल्कि शरीर का खास रिफ्लेक्स है.
नाक में धूल, एलर्जी, या कोई छोटा कण पहुंच जाए तो शरीर उसे बाहर फेंकने के लिए तेज हवा बनाता है, इसी को छींक कहते हैं.
बहुत लोग मानते हैं कि छींकते समय आंखें खुली रहें तो पुतलियां बाहर निकल सकती हैं. लेकिन ये सिर्फ मिथक है, ऐसा कभी नहीं होता.
असली वजह ये है कि छींकते वक्त मुंह से लाखों कीटाणु और छोटे कण बाहर निकलते हैं. अगर आंखें खुली हों, तो ये कण सीधे आंखों में जा सकते हैं.
इसी खतरे से बचाने के लिए शरीर खुद-ब-खुद आंखें बंद कर देता है. इसे कहते हैं प्रोटेक्टिव रिफ्लेक्स.
इस पूरी प्रक्रिया में सबसे बड़ा रोल है ट्राइजेमिनल नस का, जो चेहरे, आंख और नाक को कंट्रोल करती है.
नाक में गड़बड़ी महसूस होते ही दिमाग छींक का सिग्नल भेजता है, और उसी वक्त ये नस आंखों की मांसपेशियों को बंद करने का आदेश देती है.
ये रिफ्लेक्स इतना तेज होता है कि चाहे कितना भी कोशिश कर लें, छींकते वक्त आंखें खुली रखना लगभग नामुमकिन है.
याद रखें, छींक को रोकना कभी नहीं चाहिए. इससे कान, आंख और नाक पर दबाव बढ़ता है और नुकसान भी हो सकता है. इसे नैचुरली आने दें.