क्रिकेट पिच पर आग क्यों लगाई जाती है? क्या होती है Controlled Fire..

कभी-कभी भारी बारिश के बाद पिच बहुत गीली हो जाती है और ग्राउंडस्टाफ उसे सूखा करने के लिए controlled आग या जलती कोयला इस्तेमाल कर लेते हैं ताकि मैच को जल्द से जल्द शुरू किया जा सके.     

पिच पर जमा ‘थैच’ यानी मरे हुए घास-मिश्रित कार्बनिक पदार्थ भी गीले बने रहते हैं और यह गेंद के उछाल और गेंदबाज़ी को प्रभावित करता है, इसलिए कुछ मामलों में सर्फेस को गर्म कर-साफ करने की कोशिश की जाती है.     

हाल के मैचों में मैदान कर्मचारियों ने वेट-आउटफील्ड या पिच ड्राइ करने के लिए controlled burning का उपयोग किया, जिससे यह मुद्दा सबकी नजरों में आया.

फायर का उद्देश्य अक्सर सीधे पानी को वाष्पित करना और सतह की नमी घटाना होता है, ताकि रोलिंग व पिच-प्रेपरेशन के अगले स्टेप ठीक से किए जा सकें.     

लेकिन एक्सपर्ट्स और गार्डनिंग गाइड्स आग से थैच हटाने को जोखिम भरा बताते हैं और मैकेनिकल स्कैरिफाइंग या एरेटिंग जैसे वैकल्पिक तरीके सुझाते हैं.     

ECB और अन्य पिच-मेनेजमेंट गाइडलाइनें बताती हैं कि groundsman को स्थानीय हालत के हिसाब से ही किसी भी उपाय का चुनाव करना चाहिए और आग को सामान्य प्रैक्टिस नहीं माना जाता.   

आग लगाने से सतह पर असमानता, जलन या अतिरिक्त क्षति का खतरा होता है, इसलिए इसे केवल बहुत ज़रूरी और नियंत्रित हालात में ही अपनाया जाना चाहिए.   

आधुनिक ग्राउंड-केयर में ड्रेनेज सुधारना, थैच कंट्रोल, एरेटिंग और सावधानी से रोलिंग करके पिच को ठीक करने को प्राथमिकता दी जाती है.     

पिच पर आग एक आखिरी उपाय माना जाता है, जब वक्त कम हो और अन्य तरीके काम न करें, लेकिन सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए आम तौर पर वैकल्पिक मेथड बेहतर माने जाते हैं.