यहां लकड़ी से बना शिवलिंग क्यों कहलाता है 'घायल महादेव'? जानिए इसकी पूरी कहानी
आज यानी 14 जुलाई 2025 को सावन का पहला सोमवार है ऐसे में लोग भगवान शिव की आशीर्वाद पाने के लिए व्रत रख रहे हैं.
देश में हर जगह लोग पत्थर की मूर्ति और शिवलिंग की पूजा करते हैं. लेकिन एक जगह ऐसी जहां लकड़ी के शिवलिंग की पूजा की जाती है.
हम बात कर रहे हैं सुहवल क्षेत्र की जहां एक ऐसा शिवलिंग है जो लकड़ी का है.
सैकड़ों वर्षों से यहां स्थापित होने के बावजूद उसके रूप में कोई परिवर्तन नहीं हुआ है. लोग उन्हें घायल महादेव के नाम से जानते हैं.
मान्यता है कि सैकड़ों साल पहले एक किसान को खेतों में हल से खुदाई के दौरान जब ये शिवलिंग मिला था तो कुछ हिस्से में हल से चोट के कारण खरोच आ गई थी.
इसके निशान आज भी मौजूद हैं. इसके वजह से लोग बाबा को 'घायल महादेव' कहकर पुकारते हैं.
यही नहीं, इस लकड़ी के शिवलिंग के ऊपर सैकड़ों वर्षों से कोई छत नहीं है. गर्मी, बरसात और लोगों के जलाभिषेक के बाद भी यह शिवलिंग के स्थिति में कोई परिवर्तन नहीं हुआ है.
सुहवल क्षेत्र में मौजूद घायल महादेव के मंदिर से कई किवदंती जुड़ी हुई हैं. सैकड़ों साल पुराने इस शिव मंदिर को लेकर भक्तों के बीच अनूठी कहानी मशहूर है.
स्थानीय बुजुर्ग भूवन यादव बताते हैं कि उस समय इस स्थान पर मिट्टी का टीला हुआ करता था.
किसान के खेत की जुताई के दौरान हल का फाल जमीन में किसी ठोस वस्तु से टकराया. जब इसे बाहर निकाला गया तो लकड़ी के शिवलिंग को देख लोग हैरत में पड़ गए.
उसी रात किसान के सपने में शंकर जी प्रकट हुए और खुले आसमान के नीचे उस काष्ठ के शिवलिंग की स्थापना की राह दिखाई. हल के प्रहार से घायल इस शिवलिंग को स्थानीय लोगों और भक्तों ने वहीं स्थापित कर दिया था.
हैरत की बात है कि आज भी यह मंदिर बिना छत-गुंबद के है. खास बात यह है कि लगातार जलाभिषेक होने के बाद भी यह लकड़ी का शिवलिंग जैसे का तैसा है.