दीपावली का पर्व रोशनी और खुशियों के साथ-साथ कई पुरानी परंपराओं का भी प्रतीक है. इनमें से एक है दीपावली की रात काजल लगाना.

दीपावली के दिन देवी लक्ष्मी और भगवान कुबेर पृथ्वी पर आते हैं. इस रात को शुभ, प्रकाशमय और सुरक्षित रखना ज़रूरी माना जाता है.

मान्यता है कि काजल बुरी नजर और नकारात्मक शक्तियों से रक्षा करता है. दिवाली की रात ऊर्जा का प्रभाव बहुत बढ़ जाता है.

पूजा के बाद दीपक की लौ से बना काजल बहुत शुभ माना जाता है. इसे बच्चों और परिवार के सदस्यों की आंखों या कान के पीछे लगाया जाता है.

काजल अंधकार से प्रकाश की ओर बढ़ने का संकेत देता है. इसे लगाने वाले के जीवन में सकारात्मक ऊर्जा आती है और लक्ष्मी कृपा बनी रहती है.

पहले के समय में, दीपक और पटाखों के धुएं से आंखों को तकलीफ न हो, इसके लिए काजल को एक प्राकृतिक बचाव का तरीका माना जाता था.

कई घरों में इसे पीढ़ी दर पीढ़ी निभाया जाता है. यह परंपरा घर की सुरक्षा और शुभता से जुड़ी हुई है.

एक कथा के अनुसार, दीपावली की रात कुछ नकारात्मक शक्तियां सक्रिय हो जाती हैं. दीपक की लौ से बना काजल व्यक्ति को इन बुरी शक्तियों से बचाता है.

माना जाता है कि लक्ष्मी पूजा में जलने वाले दीपक की रोशनी और उस रोशनी से बनी कालिख में देवी की दिव्य शक्ति समाई होती है.

इसलिए, दीपावली की रात काजल लगाकर हम न केवल नजर दोष से बचते हैं, बल्कि दिव्य शक्ति को भी अपने साथ रखते हैं.