आपके काम हैं सिरदर्द और हाई BP की वजह; ठंडों में कैसे रखें ख्याल?
कान पर कोई मांसपेशियां या वसा नहीं होती जो सर्दी से रक्षा कर सके. ठंड लगते ही पूरे शरीर को प्रभावित करता है.
सर्द हवा मस्तिष्क की नसों को उत्तेजित करती है, जिससे भयंकर सिरदर्द, चक्कर और बेहोशी हो सकती है.
कान के पीछे 'फेशियल नर्व' होती है. ठंडी हवा से इसमें सूजन आ सकती है, जो चेहरे के लकवे का कारण बन सकती है.
यह एक तरह का अस्थायी लकवा हो सकता है, जिससे चेहरा टेढ़ा हो सकता है या जबड़ा अटक सकता है.
आयुर्वेद के अनुसार, कानों का संबंध वात दोष से है. कानों पर हवा लगने से शरीर में वात बढ़ता है.
कानों के ज़रिए लगी ठंड पाचन बिगाड़ सकती है. इससे पेट में गैस, मरोड़ और अपच की समस्या हो सकती है.
सर्दी लगने से रक्त वाहिनियों पर दबाव बढ़ता है. इससे BP बढ़ने का खतरा रहता है.
सर्दियों में बाहर निकलते समय कानों को मफलर या टोपी से कवर करके रखें.
रात के समय हल्के गुनगुने तेल से कान के पीछे की त्वचा पर मालिश करें. यह नसों को रिलैक्स करता है.