यह धरती के नीचे काफी गहराई में मिलता है और यह हाई टेम्परेचर और प्रेशर में बनता है. इसके अलावा इसकी कटिंग और पॉलिशिंग का काम भी काफी मुश्किल भरा होता है.
कटाई और पॉलिशिंग के बाद इनमें से बहुत कम मात्रा में रत्न-गुणवत्ता वाले हीरे मिलते हैं और इसके चलते बाजार में इनको सीमित मात्रा में रखा जाता है, ताकि इनकी कीमत अधिक बनी रहे.
रिपोर्ट्स के अनुसार, साल 1896 तक भारत पूरी दुनिया में एक मात्र हीरे का स्रोत था, जहां से हीरा पूरी दुनिया में भेजा जाता था.
इतिहासकार बताते हैं कि दुनिया को जीतने निकला सिंकदर 327 बीसी में भारत से ही हीरा यूरोप ले गया था.
कोहिनूर हीरे की कहानियां हम सब बचपन से ही सुनते आ रहे हैं जिसे अंग्रेज ब्रिटेन ले गए और वहीं रख लिया.