'जीरो फैट' कितना खतरनाक? घी-तेल छोड़ना पड़ सकता है भारी; जानें मात्रा

आजकल वजन घटाने के लिए दुनियाभर में 'जीरो-फैट' और 'लो-फैट' प्रोडक्ट्स का ट्रेंड चल रहा है.

आयुर्वेद और विज्ञान दोनों मानते हैं कि 'जीरो-फैट' का यह कॉन्सेप्ट बीमार और कमजोर कर रहा है.

समोसे, पिज्जा की जगह डाइट में देसी घी, कच्ची घानी का तेल, अखरोट सीमित मात्रा में शामिल करना जरूरी है.

बिना वसा के शरीर A, D, E और K विटामिन्स को अवशोषित ही नहीं कर सकता.

वसा का काम सिर्फ ऊर्जा देना नहीं है. गुड फैट मस्तिष्क के न्यूरॉन्स के बीच सूचनाओं के आदान-प्रदान करता है.

अगर शरीर में गुड फैट की कमी हो जाए, तो मस्तिष्क से जुड़े विकार होने लगते हैं.

शरीर के दो सबसे जरूरी हार्मोन टेस्टोस्टेरोन और एस्ट्रोजन को बनने के लिए भी वसा की सख्त जरूरत होती है.

अगर महिलाएं गुड फैट लेना बंद कर देती हैं, तो उन्हें मासिक धर्म की अनियमितता और प्रजनन में समस्या आ जाएगी.

फैट हमारे शरीर की कोशिकाओं की बाहरी परत को बनाने और उन्हें सुरक्षित रखने का काम करता है.

फैट से डरें नहीं! अपनी डाइट में अलसी के बीज, बादाम, तिल और देसी घी को संतुलित मात्रा में जगह दें.