भारत और मालदीव संबंधों का इतिहास
India Maldives Relations: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मालदीव की यात्रा पर हैं. इससे दोनों देशों के संबंधों में पड़ी धूल हट रही है. वहीं चीन को गोद में जाकर बैठा मालदीव अब भारत की ओर आशा भरी निगाहों से देख रहा है. इस दौरे में भी भारत मालदीव का कई सौगात दे रहा है. ऐसा नहीं है कि ये कोई पहली बार हो रहा है. इतिहास में भी भारत हमेशा मालदीव के साथ खड़ा रहा है. हालांकि, मोहम्मद मोइज्जू के सत्ता में आने के बाद दोनों देशों के संबंधों में खटास आने लगी थी. अब एक बार फिर से इन संबंधों में मिठास आने की गुंजाइश बन गई है.
भारत ऐतिहासिक रूप से मालदीव को बुनियादी ढांचा विकास, शिक्षा, स्वास्थ्य और रक्षा प्रशिक्षण के लिए मदद करता रहा है. हिंदुस्तान मालदीव को सैन्य, आर्थिक, आपदा राहत, स्वास्थ्य समेत तमाम क्षेत्रों में सहायता दी है. वहां के नेताओं ने हमेशा माना है कि संकट के समय भारत हमेशा रिस्पांडर रहा है. हालांकि, कई बार संबंधों (india maldives relationship) में कई बार खटास आती रही है. ऐसे में आइये जानें कब-कब भारत ने मालदीव में ऑपरेशन चलाकर उसकी मदद की है.
1988 में मालदीव में विद्रोहियों ने तख्तापलट की कोशिश की. मालदीव के तत्कालीन राष्ट्रपति मौमून अब्दुल गयूम ने भारत से मदद मांगी. भारत ने तुरंत ‘ऑपरेशन कैक्टस’ शुरू किया, जिसमें भारतीय सेना ने पैराशूट सैनिकों को माले भेजकर विद्रोहियों को नाकाम किया और राष्ट्रपति गयूम की सरकार को बचाया.
2004 की सुनामी ने मालदीव को भारी नुकसान पहुंचाया. भारत ने तुरंत राहत अभियान शुरू किया, जिसमें भारतीय नौसेना के जहाजों और हेलीकॉप्टरों के जरिए खाद्य सामग्री, दवाइयां और अन्य जरूरी सामान मालदीव पहुंचाया गया. इस अभियान में भारत ने करीब 36.39 करोड़ रुपये खर्च किए.
दिसंबर 2014 में मालदीव की राजधानी माले में आरओ प्लांट खराब होने से पीने के पानी का गंभीर संकट पैदा हो गया. मालदीव सरकार ने भारत से तत्काल मदद मांगी. भारत ने ‘ऑपरेशन नीर’ के तहत 36 घंटे के भीतर भारतीय वायुसेना के सी-17 और आईएल-76 विमानों के जरिए माले को पीने का पानी पहुंचाया.
कोविड-19 महामारी के दौरान भारत ने मालदीव को चिकित्सा उपकरण, दवाइयां और अन्य आवश्यक सामग्री प्रदान की. सितंबर 2020 में भारत ने मालदीव को आर्थिक प्रभाव से निपटने के लिए 25 करोड़ डॉलर की वित्तीय सहायता दी. मालदीव की रक्षा मंत्री मारिया दीदी ने भारत को “911 कॉल” की तरह बताया, जो संकट में हमेशा मदद करता है.
मालदीव के विदेशी मुद्रा भंडार में कमी आने पर भारत ने 2024 में कई तरह की सहायता प्रदान की. भारत ने 150 टन खाद्य पदार्थ मालदीव के दक्षिणी बंदरगाह अड्डू भेजे, जिससे आयात लागत कम हुई. इसके अलावा, भारत ने 50 मिलियन डॉलर की वित्तीय सहायता दी.
अगस्त 2024 में भारत ने मालदीव के 28 द्वीपों के लिए जल और स्वच्छता परियोजना का उद्घाटन किया, जिसमें 920 करोड़ रुपये का निवेश किया गया. इस परियोजना से 28,000 लोगों को लाभ हुआ.
जुलाई 2025 में पीएम नरेंद्र मोदी की मालदीव यात्रा के दौरान भारत ने मालदीव को BHISHM स्वास्थ्य क्यूब सेट प्रदान किए, जो स्वास्थ्य, चिकित्सा आपातकाल और आपदा प्रबंधन में सहायता करेंगे. इसके अलावा, भारत ने मालदीव के लिए लाइन ऑफ क्रेडिट को 4850 करोड़ रुपये तक बढ़ाया.
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भारत और मालदीव के बीच संबंध (india maldives relations history) मजबूत और सहयोगपूर्ण हैं. भारत ने मालदीव को विभिन्न क्षेत्रों में सहायता प्रदान की है, जिसमें रक्षा, आर्थिक सहायता, स्वास्थ्य और बुनियादी ढांचा विकास शामिल हैं. मालदीव की पूर्व रक्षा मंत्री मारिया दीदी और अन्य नेताओं ने भारत को एक भरोसेमंद सहयोगी के रूप में स्वीकार किया है, जो संकट में हमेशा मदद करता है. अब पीएम मोदी के दौरे के बाद फ्री ट्रेड डील के साथ ही और कई समझौतों पर मुहर लगने वाली है. इससे दोनों देशों के संबंध में और अधिक सहयोग आने वाला है.
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