लंदन के हाउस ऑफ लॉर्ड्स में गूंजी भारत के इस जांबाज ICS अफसर की दास्तान
Jagdishwar Nigam: भारत के स्वतंत्रता संग्राम के एक अहम लेकिन कम चर्चित अध्याय पर लंदन के हाउस ऑफ लॉर्ड्स में चर्चा हुई. 28 अक्टूबर 2026 को ब्रिटेन की संसद के हाउस ऑफ लॉर्ड्स में भारतीय सिविल सेवा (ICS) के अधिकारी जगदीश्वर निगम की भूमिका पर लिखी गई एक किताब पेश की गई. इसमें दावा किया गया है कि भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान कानपुर के तत्कालीन कलेक्टर जगदीश्वर निगम ने प्रदर्शनकारियों पर गोली चलाने का आदेश देने से इनकार कर दिया था.
The Administrator: Uncover the History Buried on 19th August 1942 नाम की इस किताब को लंदन के वेस्टमिंस्टर पैलेस स्थित कमेटी रूम जी में प्रस्तुत किया गया. किताब की लेखिका शीला दरबारी, जगदीश्वर निगम की बेटी हैं. उन्होंने इसमें अपने पिता के जीवन और 19 अगस्त 1942 से जुड़ी घटनाओं का जिक्र किया है.
किताब के मुताबिक, भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान जगदीश्वर निगम कानपुर के कलेक्टर के पद पर तैनात थे. इसमें बताया गया है कि 19 अगस्त 1942 को उन्होंने प्रदर्शनकारियों पर गोली चलाने का आदेश देने से कथित तौर पर इनकार कर दिया था. लेखिका के मुताबिक, यह फैसला उनके पिता की विरासत का एक अहम हिस्सा है.
इस किताब में एक सरकारी फाइल का भी जिक्र किया गया है. इसका संदर्भ नंबर D.1204/44-Est(s) है. शीला दरबारी का मानना है कि इस फाइल से उनके पिता के योगदान को ऐतिहासिक रिकॉर्ड से कथित तौर पर हटाए जाने के मामले पर रोशनी पड़ सकती है.
किताब में जगदीश्वर निगम की भूमिका को केवल भारत छोड़ो आंदोलन तक सीमित नहीं रखा गया है. इसमें कानपुर के औद्योगिक विकास में उनके योगदान का भी जिक्र है. लेखिका ने उनके प्रयासों को कानपुर के एक प्रमुख आर्थिक केंद्र के रूप में उभरने से जोड़ा है.
किताब पर चर्चा के लिए आयोजित इस कार्यक्रम में कई प्रमुख हस्तियां शामिल हुईं. इनमें अर्ल ऑफ मिंटो, बैरोनेस उषा प्रशार, सांसद वीरेंद्र शर्मा और बैरोनेस वर्मा समेत हाउस ऑफ लॉर्ड्स के अन्य सदस्य मौजूद रहे.
कार्यक्रम के दौरान शीला दरबारी ने उस दौर की घटनाओं के भावनात्मक महत्व को याद करते हुए कहा, “उन्होंने अपनी पूरी जिंदगी उस एक पल को जिया… वह उनके लिए दिव्य था.”
कार्यक्रम में शामिल एक प्रतिभागी ने शीला दरबारी की कहानी सुनाने की शैली की तारीफ की. उन्होंने कहा कि उनकी प्रस्तुति ने दर्शकों की दिलचस्पी बनाए रखी और लोगों को किताब पढ़ने के लिए प्रेरित किया.
शीला दरबारी का उद्देश्य अपने पिता जगदीश्वर निगम की कहानी और भारत के स्वतंत्रता संग्राम के इस कम चर्चित अध्याय को लोगों के सामने लाना है. किताब के जरिए वह 19 अगस्त 1942 की घटनाओं, अपने पिता की भूमिका और उनके योगदान से जुड़े उन पहलुओं पर ध्यान दिलाना चाहती हैं, जिन्हें उनके मुताबिक इतिहास में पर्याप्त जगह नहीं मिली.
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किताब में किए गए दावों और सरकारी फाइल के संदर्भ के जरिए उस दौर की घटनाओं को नए सिरे से समझने की कोशिश की गई है.
-भारत एक्सप्रेस
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