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फलों की रानी की मार्केट में एंट्री; दाम सुनते ही उड़ जाएंगे होश, जानें क्या है GI टैग वाली लीची का ताजा भाव

Muzaffarpur Shahi Litchi: गर्मियों का मौसम आते ही खाने-पीने के शौकीनों को जिस एक चीज का सबसे बेसब्री से इंतजार रहता है, वह है फलों की रानी ‘शाही लीची’. अगर आप भी इसके दीवाने हैं, तो आपके लिए एक बेहद मीठी और अच्छी खबर है. बिहार के मुजफ्फरपुर की विश्व प्रसिद्ध शाही लीची ने आखिरकार बाजार में अपनी शानदार एंट्री मार दी है. शहर के स्टेशन रोड और क्लब रोड जैसे प्रमुख बाजारों में लाल-लाल, रसीली लीचियों से सजी दुकानें ग्राहकों का मन मोह रही हैं.

हालांकि, अगर आप अभी इसका स्वाद चखना चाहते हैं, तो आपको अपनी जेब थोड़ी ज्यादा ढीली करनी होगी. सीजन की शुरुआती आवक होने की वजह से फिलहाल इसकी कीमत आसमान छू रही है और यह बाजार में ₹400 प्रति सैकड़ा (100 पीस) के भाव से बिक रही है.

महंगी होने के बावजूद तोड़ने लगी रिकॉर्ड

बाजार के स्थानीय दुकानदारों का कहना है कि अभी बागानों से लीची की तुड़ाई बहुत ही सीमित मात्रा में की जा रही है. बाजार में फल कम है और इसके चाहने वाले बहुत ज्यादा, इसलिए डिमांड और दाम दोनों ही इस समय सातवें आसमान पर हैं.

रोहुआ इलाके के लीची कारोबारी वीरू साह बताते हैं कि शाही लीची का क्रेज लोगों के सिर चढ़कर बोलता है. इसकी लाजवाब सुगंध और पतले छिलके की वजह से लोग सीजन की पहली खेप का स्वाद लेने के लिए ₹400 का भाव भी खुशी-खुशी चुका रहे हैं.

थोड़ा सा इंतजार… और फिर मिलेगी बड़ी राहत

अगर ₹400 का भाव सुनकर आपका बजट बिगड़ रहा है, तो घबराने की बिल्कुल जरूरत नहीं है. यह महंगाई बस कुछ ही दिनों की मेहमान है. कांटी इलाके से मंडी पहुंचे फल व्यापारी विशाल साह ने बताया कि बागानों में अब बड़े पैमाने पर लीची तोड़ने की तैयारी पूरी हो चुकी है.

अगले एक हफ्ते के भीतर बाजार में लीची की गाड़ियों की लाइन लग जाएगी. ऐसा अनुमान है कि मई के आखिरी हफ्ते से लेकर जून के शुरुआती दिनों तक बाजार शाही लीची से पूरी तरह पट जाएगा. जैसे ही आवक बढ़ेगी, वैसे ही इसके दाम तेजी से नीचे गिरेंगे और यह पूरी तरह आम आदमी के बजट में आ जाएगी.

तेज धूप घोलेगी असली मिठास

कृषि विशेषज्ञों की मानें तो अभी लीची पर शुरुआती लाल रंग चढ़ा है. आने वाले दिनों में जैसे-जैसे मई की तेज धूप बढ़ेगी, फल पूरी तरह से पककर तैयार हो जाएंगे. धूप बढ़ने के बाद ही लीची का असली रसीलापन, सुर्खी और मिठास निखर कर सामने आती है.

आपको बता दें कि मुजफ्फरपुर की इस शाही लीची को ‘जीआई टैग’ (GI Tag) यानी भौगोलिक संकेतक भी मिला हुआ है, जिसका मतलब है कि इसके जैसा स्वाद दुनिया में कहीं और नहीं मिल सकता. यही वजह है कि दिल्ली, मुंबई और कोलकाता जैसे बड़े शहरों के बड़े-बड़े व्यापारी अभी से ही मुजफ्फरपुर में डेरा डाल चुके हैं. जल्द ही ट्रेनों और फ्लाइट्स के जरिए यह शाही लीची देश के कोने-कोने तक का सफर तय करने वाली है. तब तक के लिए थोड़ा इंतजार करना पड़ सकता है.ये भी पढ़ें: पटना में ‘ब्लैक आउट’ के बीच खूनी खेल: बत्ती गुल होते ही कारोबारी पर ताबड़तोड़ फायरिंग, इलाके में मचा दहशत

-भारत एक्सप्रेस

Vaibhav Gupta

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