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कतर के पूर्व अमीर के निधन पर भारत में आज राष्ट्रीय शोक, जानें आम दिनों से कितना अलग होता है ये दिन?

National Mourning Rules India: कतर के पूर्व अमीर के निधन पर भारत सरकार द्वारा आज एक दिन के राष्ट्रीय शोक की घोषणा के बाद देश की कूटनीतिक और प्रशासनिक व्यवस्था सुर्खियों में है. किसी विदेशी राष्ट्राध्यक्ष या कद्दावर वैश्विक हस्ती के निधन पर भारत में राष्ट्रीय शोक घोषित करना गहरी अंतरराष्ट्रीय दोस्ती और प्रोटोकॉल का हिस्सा होता है.

लेकिन क्या आप जानते हैं कि भारत के गृह मंत्रालय (MHA) की रूल बुक और ‘फ्लैग कोड ऑफ इंडिया’ के तहत इसके बेहद कड़े और विशिष्ट नियम तय किए गए हैं? यह दिन आम दिनों से बिल्कुल अलग होता है क्योंकि इस दौरान देश की संप्रभुता के प्रतीक तिरंगे से लेकर सरकारी कामकाज के तौर-तरीकों तक में बहुत बड़ा और आधिकारिक बदलाव आ जाता है.

क्या है गृह मंत्रालय का वो खास नियम?(National Mourning Rules India)

भारत में राष्ट्रीय शोक घोषित करने का विशेषाधिकार पूरी तरह से केंद्रीय गृह मंत्रालय के पास होता है. गृह मंत्रालय के विशेष प्रोटोकॉल के मुताबिक, जब भी किसी मित्र देश के वर्तमान या पूर्व राष्ट्राध्यक्ष (राष्ट्रपति या प्रधानमंत्री) का निधन होता है, तो भारत सरकार कूटनीतिक संबंधों की गर्मजोशी को दिखाने के लिए राष्ट्रीय शोक का आधिकारिक नोटिफिकेशन जारी करती है.

हालांकि, देश के गणमान्य नागरिकों (जैसे वर्तमान राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री या केंद्रीय मंत्रियों) के निधन और विदेशी हस्तियों के निधन के नियमों में एक बड़ा अंतर होता है. देश के अंदरूनी गणमान्य व्यक्तियों के निधन पर पूरे देश या संबंधित राज्य में अनिवार्य रूप से राजकीय शोक और सार्वजनिक अवकाश तक की व्यवस्था होती है, जबकि विदेशी हस्तियों के मामले में यह पूरी तरह सरकार के कूटनीतिक विवेक, अंतरराष्ट्रीय संबंधों और रणनीतिक हितों पर निर्भर करता है, जिसमें सामान्यतः छुट्टियां नहीं दी जातीं.

राष्ट्रीय शोक के दौरान क्या बदल जाता है?

गृह मंत्रालय के नियमों (National Mourning Rules India) के अनुसार, राष्ट्रीय शोक के दिन पूरे देश में उन सभी सरकारी इमारतों और भवनों पर राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा आधा झुका (Half-Masted) दिया जाता है, जहाँ इसे नियमित रूप से फहराया जाता है. इसके अलावा, विदेशों में स्थित सभी भारतीय दूतावासों, उच्चायोगों और वाणिज्य दूतावासों में भी तिरंगे को आधा झुकाकर भारत की संवेदना प्रकट की जाती है. ‘फ्लैग कोड ऑफ इंडिया’ के तहत इसका सख्त नियम है कि झंडे को पहले पूरी ऊंचाई तक फहराया जाता है, और फिर धीरे से आधा झुकाया जाता है.

इसके साथ ही, राष्ट्रीय शोक की अवधि के दौरान सरकार की ओर से आयोजित होने वाले सभी आधिकारिक मनोरंजन, सांस्कृतिक कार्यक्रम, बड़े जश्न और सरकारी कूटनीतिक पार्टियां पूरी तरह से प्रतिबंधित या स्थगित कर दी जाती हैं, हालांकि आवश्यक सरकारी कामकाज और संसद की कार्यवाही सामान्य रूप से चलती रहती है.

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कतर के ‘फादर अमीर’ को क्यों मिला यह सम्मान?

कतर के पूर्व अमीर, जिन्हें वहां की जनता और वैश्विक मीडिया सम्मान से ‘फादर अमीर’ (Father Amir) कहता है, भारत के बेहद करीबी और विश्वसनीय मित्र माने जाते थे. उनके शासनकाल के दौरान भारत और कतर के बीच व्यापार, ऊर्जा सुरक्षा, विशेषकर लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) की आपूर्ति और रक्षा सहयोग के क्षेत्र में ऐतिहासिक और युगांतरकारी समझौते हुए थे.

इसके साथ ही, कतर में रहने वाले लाखों प्रवासी भारतीय समुदाय के हितों और उनकी सुरक्षा को लेकर भी पूर्व अमीर का नजरिया हमेशा बेहद सहयोगात्मक और सकारात्मक रहा. यही वजह है कि भारत सरकार ने उनके निधन पर गहरी संवेदना व्यक्त करते हुए इस सर्वोच्च राजकीय सम्मान की घोषणा की है, जो हिंद-प्रशांत और खाड़ी देशों के क्षेत्र में भारत की मजबूत और दीर्घकालिक विदेश नीति का एक सीधा और कड़क संदेश है.

-भारत एक्सप्रेस

 

Rohit Agrawal

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