देश

“लगातार तीसरी बार ऐतिहासिक कार्यकाल…”, पीएम मोदी ने डेनमार्क की पीएम फ्रेडरिक्सन को खास अंदाज में दी बधाई

पीएम नरेंद्र मोदी ने फ्रेडरिकसन को तीसरी बार डेनमार्क का प्रधानमंत्री बनने पर बधाई दी है. उन्होंने अपने ‘एक्स’ पोस्ट में उन्हें मित्र कहकर संबोधित करते हुए उनके उल्लेखनीय कार्यकाल के लिए बधाई दी.

उन्होंने लिखा,

मेरे मित्र मेटे फ्रेडरिकसन को लगातार तीसरी बार उल्लेखनीय कार्यकाल के लिए डेनमार्क के प्रधान मंत्री के रूप में पदभार संभालने पर बधाई.

पीएम मोदी ने आगे कहा कि भारत और डेनमार्क आपसी विश्वास, साझा मूल्यों और स्थायी भविष्य के लिए साझा प्रतिबद्धता पर आधारित एक स्थायी साझेदारी साझा करते हैं. मैं भारत-डेनमार्क हरित रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने और हमारे लोगों के लाभ के लिए हमारे सहयोग को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए प्रधान मंत्री फ्रेडरिकसन के साथ मिलकर काम करने के लिए उत्सुक हूं.

भारत और डेनमार्क दोस्त क्यों हैं?

भारत और डेनमार्क के बीच संबंध केवल व्यापार तक सीमित नहीं हैं. दोनों देश लोकतंत्र, कानून के शासन और शांतिपूर्ण अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था में विश्वास रखते हैं. दोनों के राजनयिक संबंध 1949 से हैं और व्यापारिक संपर्क तो लगभग 400 साल पुराने माने जाते हैं.

आज दोनों देशों का सबसे बड़ा सहयोग किस क्षेत्र में है?

अगर एक वाक्य में कहें तो भारत के पास बड़ा बाजार और विकास की जरूरत है, जबकि डेनमार्क के पास हरित (ग्रीन) तकनीक और विशेषज्ञता है. इसी वजह से 2020 में दोनों देशों ने ‘ग्रीन स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप’ शुरू की. इसका मकसद पर्यावरण, स्वच्छ ऊर्जा, जल प्रबंधन और जलवायु परिवर्तन जैसे क्षेत्रों में मिलकर काम करना है.

दोनों देश अब केवल औपचारिक कूटनीतिक संबंधों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि ऐसे क्षेत्रों में साथ काम कर रहे हैं जिनका सीधा असर लोगों की ज़िंदगी और अर्थव्यवस्था पर पड़ता है. जैसे- स्वच्छ ऊर्जा, पर्यावरण संरक्षण, पानी की बेहतर व्यवस्था, नई तकनीक और टिकाऊ विकास.

दोनों देशों के बीच बढ़ा भरोसा

पिछले कुछ वर्षों में दोनों देशों के शीर्ष नेतृत्व के बीच नियमित बातचीत और मुलाकातों ने भरोसा बढ़ाया है. इसी वजह से कई संयुक्त परियोजनाएं आगे बढ़ी हैं और कंपनियों के बीच सहयोग भी बढ़ा है.

वर्तमान में दोनों देशों की सोच यह है कि आर्थिक विकास और पर्यावरण संरक्षण साथ-साथ चल सकते हैं. भारत अपनी विकास आवश्यकताओं को पूरा करना चाहता है, जबकि डेनमार्क अपनी उन्नत हरित तकनीकों और अनुभव के माध्यम से सहयोग देना चाहता है. यही कारण है कि दोनों देश भविष्य में ऊर्जा, जलवायु और नवाचार के क्षेत्रों में साझेदारी को और गहरा करने की कोशिश कर रहे हैं.

ये भी पढ़ें: “मन अत्यंत व्यथित है…” मालवीय नगर के रेस्टोरेंट में 21 लोगों की मौत पर गृह मंत्री अमित शाह ने जताया गहरा शोक

-भारत एक्सप्रेस

महिमा कटारिया

Recent Posts

‘इजरायल से बात करना गद्दारी नहीं’, PAK एक्सपर्ट की शहबाज शरीफ को सलाह… क्या मुस्लिमों को धोखा देगा पाकिस्तान?

Pakistan Foreign Policy: इजरायल से बातचीत को गद्दारी न मानते हुए पाकिस्तानी एक्सपर्ट ने शहबाज…

2 minutes ago

नवरात्रि पर वैष्णो देवी जाने का बना रहे हैं प्लान? दिल्ली-कटरा वंदे भारत की टाइमिंग और किराया जान लें

अगर आप इस शारदीय नवरात्रि पर दिल्ली से माता वैष्णो देवी के दर्शन के लिए…

24 minutes ago

मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ प्रदर्शन मामले में पटियाला हाउस कोर्ट से 17 छात्रों और पत्रकारों को मिली जमानत

पटियाला हाउस कोर्ट ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान गिरफ्तार…

27 minutes ago