King Cobra Terror: भूपेंद्र साहू/ कोरबा: छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले से एक ऐसी खबर सामने आई है जिसने न केवल स्थानीय ग्रामीणों की नींद उड़ा दी, बल्कि सोशल मीडिया पर भी चर्चा का विषय बनी हुई है. बालको क्षेत्र के तिलईदाड़ गांव में उस वक्त अफरा-तफरी मच गई, जब एक घर के बंद पड़े पुराने सेप्टिक टैंक के अंदर लोगों ने कुछ हिलता हुआ देखा. जब करीब जाकर देखा गया तो सबके होश उड़ गए—वहां एक या दो फीट का नहीं, बल्कि पूरे 12 फीट का विशालकाय ‘किंग कोबरा’ कुंडली मारकर बैठा था. इतने बड़े विषधर को देखकर पूरे गांव में दहशत फैल गई और देखते ही देखते लोगों का हुजूम उमड़ पड़ा.
बताया जा रहा है कि यह सांप पिछले कुछ दिनों से उसी टैंक में फंसा हुआ था. गनीमत रही कि किसी का पैर वहां नहीं पड़ा, वरना बड़ा हादसा हो सकता था. ग्रामीणों ने बिना देरी किए इसकी सूचना वन विभाग और ‘नोवा नेचर’ की रेस्क्यू टीम को दी.
सूचना मिलते ही विशेषज्ञों की टीम मौके पर पहुंची. सांप की लंबाई और उसकी आक्रामकता को देखते हुए रेस्क्यू ऑपरेशन काफी चुनौतीपूर्ण था, लेकिन टीम ने बेहद धैर्य और सावधानी के साथ काम किया. काफी देर की मशक्कत के बाद आखिरकार उस 12 फीट लंबे किंग कोबरा को सुरक्षित पकड़कर थैले में डाला गया, तब जाकर गांव वालों ने राहत की सांस ली.
किंग कोबरा को दुनिया का सबसे लंबा और खतरनाक विषधर माना जाता है. इसकी लंबाई 20 फीट या उससे भी ज्यादा हो सकती है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि यह सांप पर्यावरण के लिए कितना जरूरी है? किंग कोबरा मुख्य रूप से दूसरे सांपों को खाकर अपना पेट भरता है, जिससे सांपों की आबादी संतुलित रहती है.
इसकी सबसे हैरान करने वाली खूबी इसका ‘मातृत्व’ है. किंग कोबरा दुनिया का एकमात्र ऐसा सांप है जिसकी मादा अपने अंडों के लिए पत्तों का इस्तेमाल करके बाकायदा एक घोंसला बनाती है. इतना ही नहीं, वह करीब तीन महीने तक भूखी-प्यासी रहकर उस घोंसले की पहरेदारी करती है. सांपों की दुनिया में बच्चों के प्रति ऐसा प्रेम और समर्पण कहीं और देखने को नहीं मिलता.
रेस्क्यू टीम के विशेषज्ञों का कहना है कि किंग कोबरा स्वभाव से शर्मीला होता है और बिना वजह इंसानों पर हमला नहीं करता. वह केवल तभी आक्रामक होता है जब उसे अपनी जान को खतरा महसूस हो या उसे उकसाया जाए. इसलिए, अगर कभी आपके आसपास ऐसा कोई जीव दिखे, तो उसे मारने की गलती न करें. सांप को मारने के बजाय तुरंत वन विभाग या प्रशिक्षित स्नेक कैचर्स को फोन करें. इससे न केवल आपकी जान सुरक्षित रहेगी, बल्कि पर्यावरण के इस महत्वपूर्ण अंग को भी बचाया जा सकेगा.
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-भारत एक्सप्रेस
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