अजब-गजब

आत्महत्या को लेकर क्या कहता है इस्लाम? मिलती है ये सजा

सुसाइड को हर धर्म में पाप या गुनाह माना जाता है, चाहे वो हिंदू हो, मुस्लिम हो. सिख हो या फिर ईसाई. लेकिन आज हम जानेंगे कि आत्महत्या को लेकर मुस्लिम धर्म में क्या मान्यताएं है और उनके धार्मिक किताब ‘कुरान’ में इसको लेकर क्या बताया गया है.

दुनिया भर में आत्म हत्या के मामले बढ़ते ही चले जा रहे है. वहीं अगर धार्मिक तौर पर देखा जाए, तो सुसाइड को हर धर्म में एक पाप माना जाता है. इस्लाम धर्म में भी ठीक ऐसा ही है, जिसमें इसे एक बड़े गुनाह के तौर पर देखा जाता है. लेकिन इसपर इस सवाल का मन में उठना आम बात है कि इस धर्म में इसको लेकर क्या कहा गया है और इसके लिए क्या सजा रखी गई है?

क्या कहते हैं स्कॉलर?

कुरान और हदीस (नैतिक मार्गदर्शन का एक स्रोत) में आत्महत्या करने वालों को सख्त सजा की बात कही गई है. वहीं, इस्लामिक स्कॉलर मुफ्ती सलाउद्दीन कासमी ने बताहा कि कोई भी इंसान, जो चाहे कितनी भी परेशानी से जुझ रहा हो, बिमार हो, लेकिन खुदखुशी करने की इजाजत नहीं है. आत्महत्या करना हराम है और इसकी सजा जहन्नुम है.

वहीं, कुरान की सूरह अन निसा की आयत 29 में अल्लाह ने फरमाया, “ऐ ईमान वालो! आपस में एक-दूसरे के माल गलत तरीके से न खाओ – यह और बात है कि तुम्हारी आपस में रज़ामन्दी से कोई सौदा हो और अपना गला घोंट कर अपनी जान न दो (क्योंकि) खुदा तुम्हारे हाल पर मेहरबान है.”

क्या है खुदकुशी की सजा?

हालांकि, इस्लाम की मान्यताओं के अनुसार, आत्महत्या को कुफ्र (अल्लाह को न मानना) नहीं माना जाता है, लेकिन यह ऐसा गुनाह है जिसकी जिसकी सजा जिंदगी के खत्म होने के बाद भी मिलती है. ऐसा माना जाता है कि आत्महत्या करने वालों की रूह या आत्मा कयामत तक सिज्जीन (नरक) में कैद कर दी जाती है. पैगंबर मुहम्मद ने कहा, “जो इंसान खुद को मारता है, उसे मरने के बाद उसी तरह की सजा होगी जिससे उसने खुद को खत्म किया.”

वहीं, इस्लामिक मान्यता के मुताबिक, जिंदगी अल्लाह ने दी है और इसको खत्म करने का हक सिर्फ अल्लाह को है. इस्लाम किसी भी हालत में खुदकुशी की इजाजत नहीं देता क्योंकि ये गुनाह ही नहीं बल्कि हराम अमल है.

आत्महत्या करने वालों के लिए नमाज पढ़ने को लेकर मतभेद

इस्लाम धर्म (Islam religion) में आत्महत्या करने वालों के लिए जनाजे की नमाज पढ़ने को लेकर एक मतभेद भी है. इस्लामिक स्कॉलर मुफ्ती सलाउद्दीन कासमी ने बताया कि पैगंबर मुहम्मद ने कहा है कि आत्महत्या करने वालों के लिए जनाजे की नमाज नहीं पढ़नी चाहिए. वहीं कई सारे सहाबा और बाद के इस्लामी जानकारों का मानना है कि आत्महत्या करने वालों की नमाज-ए-जनाजा भी पढ़ी जा सकती है. ऐसा इसलिए क्योंकि वो भी मुस्लिम है.

इस्लाम में आत्महत्या को रोकने के लिए कई उपाय बताए गए हैं. इस्लामिक स्कॉलर मुफ्ती सलाउद्दीन कासमी के अनुसार, आत्महत्या करने वालों को अल्लाह की रहमत से मायूस नहीं होना चाहिए और उन्हें अपने गुनाहों के लिए तौबा करनी चाहिए.

ये भी पढें: Dating Survey: ऑफिस में नॉटी हो रहे भारतीय, दफ्तर में रोमांस मामले में अमेरिका को पीछे छोड़ा

-भारत एक्सप्रेस

Vaibhav Gupta

Recent Posts

नेपाल क्यों बन जाता है भारतीय अपराधियों की पहली पसंद? खुले बॉर्डर, कानूनी पेच और गैंग नेटवर्क की पूरी कहानी

Why Criminals Escape to Nepal: आखिर भारतीय अपराधी नेपाल क्यों भागते हैं? जानिए भारत-नेपाल की…

7 minutes ago

धुले बना कुत्तों का कब्रगाह: तड़पा-तड़पा कर 16 बेजुबानों को मारा, पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट से सब सन्न

Dhule Dog Poisoning Case: महाराष्ट्र के धुले जिले के वाडीभोकर रोड स्थित सुशांत कॉलोनी इलाके…

22 minutes ago

एक वोटर के 4-4 कार्ड! यूपी में SIR के बावजूद कैसे मिले डुप्लीकेट नाम?

यूपी में SIR के तहत 2 करोड़ नाम कटने और फाइनल लिस्ट आने के बाद…

35 minutes ago

राइफल छोड़ टुल्ल हुआ ASI, कान्सटेबल ने पार की हद; वायरल हुआ अंबिकापुर का वीडियो

Ambikapur News: छत्तीसगढ़ के अंबिकापुर से पुलिस विभाग को शर्मसार करने वाला मामला सामने आया…

49 minutes ago

UPPSC में ऐतिहासिक पल, सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस विक्रम नाथ बोले- ‘भर्ती में पहचान नहीं, सिर्फ योग्यता मायने रखती है’

प्रयागराज में यूपीपीएससी के इतिहास में पहली बार सुप्रीम कोर्ट के सेवारत न्यायमूर्ति विक्रम नाथ…

55 minutes ago

दीवारें ढहीं…भीलवाड़ा में दहला देने वाला धमाका, पिकअप गाड़ी के उड़े चिथड़े

राजस्थान के भीलवाड़ा में आगूचा गांव के पास एक पिकअप गाड़ी में हुए जोरदार धमाके…

57 minutes ago