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समुद्र की सुरक्षा पर BRICS का फोकस, पीएम मोदी ने रखा सीफेरर्स के लिए इमरजेंसी नेटवर्क का प्रस्ताव

दुनिया का बड़ा हिस्सा कारोबार समुद्र के रास्ते होने वाले परिवहन पर निर्भर है. एक देश से दूसरे देश तक तेल, गैस, खाद्य सामग्री, कच्चा माल और तैयार सामान पहुंचाने में समुद्री जहाजों की अहम भूमिका होती है. ऐसे में समुद्री रास्तों की सुरक्षा सीधे तौर पर वैश्विक व्यापार और अर्थव्यवस्था से जुड़ जाती है.

हाल के वर्षों में कई समुद्री मार्गों पर संघर्ष, हमलों और भू-राजनीतिक तनाव के कारण जहाजों और उनमें काम करने वाले कर्मचारियों की सुरक्षा चिंता का विषय बनी है. इसी बीच BRICS के मंच से समुद्री सुरक्षा और सीफेयरर्स यानी जहाजों पर काम करने वाले कर्मचारियों की सुरक्षा को लेकर महत्वपूर्ण चर्चा सामने आई है.

PM मोदी ने सीफेयरर्स के लिए रखा इमरजेंसी नेटवर्क का प्रस्ताव

BRICS शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने समुद्र में संकट का सामना करने वाले सीफेयरर्स की मदद के लिए एक “Seafarers’ Emergency Support Network” बनाने का प्रस्ताव रखा.

इस नेटवर्क का उद्देश्य अलग-अलग देशों की समुद्री एजेंसियों और राजनयिक मिशनों के बीच बेहतर संपर्क स्थापित करना है. अगर किसी जहाज के कर्मचारी समुद्र में किसी संकट में फंसते हैं तो उन्हें जल्दी मदद, चिकित्सा सहायता और जरूरत पड़ने पर सुरक्षित बाहर निकालने में यह व्यवस्था मदद कर सकती है.

इसके अलावा संकट की स्थिति में कर्मचारियों के परिवारों तक जानकारी पहुंचाने और संबंधित देशों के बीच बेहतर समन्वय की भी व्यवस्था हो सकती है.

समुद्री रास्तों की सुरक्षा क्यों जरूरी है?

दुनिया का अंतरराष्ट्रीय व्यापार बड़े पैमाने पर समुद्री परिवहन पर निर्भर है. अगर किसी महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग पर युद्ध, हमला या अन्य संकट पैदा होता है, तो इसका असर केवल जहाजों तक सीमित नहीं रहता.

जहाजों की आवाजाही प्रभावित होने पर सामान की सप्लाई में देरी हो सकती है. इससे परिवहन लागत बढ़ सकती है और कई देशों में जरूरी वस्तुओं की कीमतों पर भी असर पड़ सकता है. इसी वजह से समुद्री रास्तों को सुरक्षित रखना वैश्विक व्यापार की निरंतरता के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है.

सीफेयरर्स की सुरक्षा भी बड़ी चिंता

समुद्री सुरक्षा की चर्चा में अक्सर जहाजों और व्यापारिक मार्गों पर ध्यान दिया जाता है, लेकिन जहाजों पर काम करने वाले लोगों की सुरक्षा भी उतनी ही महत्वपूर्ण है. सीफेयरर्स कई बार ऐसे समुद्री इलाकों से गुजरते हैं जहां युद्ध या तनाव की स्थिति होती है. ऐसे क्षेत्रों में काम करने वाले कर्मचारियों को हमले, मिसाइल हमले, जहाजों पर कब्जे या अन्य आपात परिस्थितियों का सामना करना पड़ सकता है.

भारत के लिए यह मुद्दा इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि देश के बड़ी संख्या में प्रशिक्षित सीफेयरर्स दुनिया भर के व्यापारिक जहाजों पर काम करते हैं. रिपोर्ट के अनुसार, भारत के सीफेयरर्स की संख्या वैश्विक स्तर पर महत्वपूर्ण हिस्सेदारी रखती है.

पश्चिम एशिया और ब्लैक सी में बढ़ी चुनौतियां

पश्चिम एशिया और ब्लैक सी जैसे क्षेत्रों में संघर्ष और तनाव ने समुद्री परिवहन के जोखिम को बढ़ाया है. इन क्षेत्रों से गुजरने वाले जहाजों और उनके कर्मचारियों को कई तरह की चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है.

भारत सरकार की ओर से भी जोखिम वाले समुद्री इलाकों में भारतीय कर्मचारियों की सुरक्षा को लेकर कदम उठाए गए हैं. रिपोर्ट के मुताबिक, भारतीय जहाजरानी अधिकारियों ने भारतीय क्रू को हाई-रिस्क वाले क्षेत्रों से दूर रखने के लिए दिशा-निर्देश जारी किए हैं.

भारत के लिए क्यों अहम है यह मुद्दा?

भारत दुनिया के बड़े समुद्री व्यापारिक देशों में शामिल है और देश के लाखों लोग प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से समुद्री क्षेत्र से जुड़े हैं. भारतीय सीफेयरर्स अलग-अलग देशों के व्यापारिक जहाजों पर काम करते हैं. ऐसे में दुनिया के किसी भी महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग में लंबे समय तक अस्थिरता का असर भारतीय कर्मचारियों और उनके परिवारों पर भी पड़ सकता है. यही वजह है कि भारत समुद्री सुरक्षा के साथ-साथ सीफेयरर्स की सुरक्षा को भी अंतरराष्ट्रीय मंचों पर प्रमुखता से उठा रहा है.

आपात स्थिति में क्या करेगा प्रस्तावित नेटवर्क?

अगर यह व्यवस्था आगे बढ़ती है तो संकट के समय अलग-अलग देशों की एजेंसियों के बीच एक साझा संपर्क व्यवस्था बनाई जा सकती है.

इसके जरिए:

  • संकट में फंसे सीफेयरर्स तक तुरंत मदद पहुंचाने की कोशिश होगी.
  • मेडिकल सहायता उपलब्ध कराने में समन्वय किया जा सकेगा.
  • कर्मचारियों के परिवारों को समय पर जानकारी दी जा सकेगी.
  • जरूरत पड़ने पर सुरक्षित निकासी यानी evacuation में मदद मिल सकेगी.
  • अलग-अलग देशों की समुद्री और राजनयिक एजेंसियों के बीच संपर्क बेहतर होगा.

इस तरह समुद्र में किसी आपात स्थिति के दौरान अलग-अलग देशों के बीच होने वाली देरी को कम करने में मदद मिल सकती है.

BRICS के लिए भी अहम मुद्दा

सीफेयरर्स की सुरक्षा का मुद्दा BRICS की व्यापक भूमिका से भी जुड़ा है. भारत की ओर से यह संदेश दिया गया है कि वैश्विक व्यापार को सुरक्षित रखने के लिए केवल व्यापारिक नियम और आर्थिक सहयोग ही पर्याप्त नहीं हैं, बल्कि उन लोगों की सुरक्षा भी जरूरी है जो इस व्यापार को जमीन और समुद्र पर संभव बनाते हैं.

BRICS देशों के बीच समुद्री सुरक्षा को लेकर सहयोग बढ़ने से समुद्री व्यापार, आपातकालीन सहायता और संकट के समय अंतरराष्ट्रीय समन्वय के नए रास्ते खुल सकते हैं.

समुद्री सुरक्षा और व्यापार को अलग-अलग नहीं देखा जा सकता

आज जब दुनिया के कई हिस्सों में भू-राजनीतिक तनाव बढ़ रहा है, समुद्री व्यापार की सुरक्षा एक बड़ी चुनौती बनती जा रही है. किसी समुद्री मार्ग पर संकट का असर कई देशों की अर्थव्यवस्था और सप्लाई चेन तक पहुंच सकता है.

ऐसे में सुरक्षित समुद्री रास्ते, सुरक्षित जहाज और सुरक्षित सीफेयरर्स तीनों एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं.

BRICS के मंच से सीफेयरर्स के लिए इमरजेंसी सपोर्ट नेटवर्क का प्रस्ताव इसी दिशा में एक पहल के रूप में सामने आया है. यदि इसे आगे बढ़ाया जाता है, तो संकट के समय समुद्र में काम करने वाले कर्मचारियों को सहायता पहुंचाने के लिए देशों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित हो सकता है.

-भारत एक्सप्रेस

Prashant Kumar

CEO – Bharat Express Digital Chief Advisor to the Chairman & Managing Director and Editor-in-Chief Mr. Prashant Kumar is a digital, media and growth transformation leader with 18+ years of experience across strategy, technology, AI, marketing and business transformation, having worked with leading organisations including Amazon, IBM, Adidas and Tata Consumer Products. At Bharat Express, he leads digital transformation, audience growth, technology, partnerships, monetisation and new business initiatives to build a scalable, future-ready media ecosystem.

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