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India–UK Free Trade Agreement: ब्रिटेन के साथ FTA करना EU और अमेरिका के साथ भविष्‍य की डील के लिए भारत का खाका

India–UK FTA: भारत और ब्रिटेन ने आखिरकार एक ऐतिहासिक मुक्त व्यापार समझौता (FTA) पर दस्तखत कर दिए हैं. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ब्रिटिश प्रधानमंत्री कीर स्टारमर की मौजूदगी में इस समझौते को अंतिम रूप दिया गया. यह समझौता भारत की व्यापार नीति में बड़ा मोड़ साबित हो सकता है. अनुमान है कि इससे दोनों देशों के बीच सालाना व्यापार 34 अरब डॉलर तक बढ़ेगा.

इस समझौते के तहत भारत, यूके से आने वाले 90% सामानों पर शुल्क घटाएगा. वहीं, यूके भारत के 99% निर्यात पर सीमा शुल्क खत्म कर देगा. इसमें खास तौर पर वस्त्र, दवाइयां, इलेक्ट्रॉनिक्स और कृषि जैसे क्षेत्र शामिल हैं.

यह समझौता केवल व्यापार के आंकड़ों तक सीमित नहीं है. यह भारत की बदली हुई व्यापार सोच को भी दर्शाता है की अब हम संरक्षणवाद से व्यावहारिकता की ओर बढ़ रहे हैं. दिल्ली हाई कोर्ट के अधिवक्ता गौतम मोहंती के मुताबिक, “भारत-यूके समझौता सिर्फ एक व्यापारिक करार नहीं, बल्कि एक रणनीतिक संकेत है.”

‘भारत अब इन समझौतों को रक्षात्मक नहीं’

यह समझौता पहले के FTA से ज्यादा आधुनिक है. इसमें डिजिटल व्यापार, श्रमिक गतिशीलता और साझा नियम-निर्माण जैसे विषय शामिल हैं. मोहंती का कहना है कि, “भारत अब इन समझौतों को रक्षात्मक नहीं, बल्कि रणनीतिक औजार के रूप में देख रहा है.”

महत्वपूर्ण बात यह है कि भारत ने डेटा प्रवाह और निवेशक-राज्य विवाद निपटान (ISDS) जैसे संवेदनशील मुद्दों पर दबाव झेलने के बावजूद अपनी स्थिति नहीं बदली. इसके बजाय, भारत ने आपसी संवाद और सहयोग आधारित विवाद समाधान प्रणाली को अपनाया है.

SKV लॉ ऑफिसेस की मैनेजिंग पार्टनर कनिका चुग का कहना है, ‘यह समझौता डिजिटल व्यापार, बौद्धिक संपदा और मानकों के एकीकरण पर विस्तृत नियम तय करता है. WTO जैसी प्रणाली के तहत विवाद समाधान प्रक्रिया व्यापार में स्थिरता और अनुबंधों के पालन को मजबूत करती है.’

हालांकि कानूनी सेवाओं को इस समझौते में शामिल नहीं किया गया है, फिर भी यह भारतीय वकीलों के लिए बड़ा अवसर है. कनिका चुग मानती हैं कि भारतीय लॉ फर्म अब व्यापार संरचना, क्षेत्रीय नियमन और संधि व्याख्या में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं.

भारत को सबसे बड़ा व्यापारिक फायदा

यह समझौता व्यापार पहुंच के मामले में भारत के पक्ष में झुका हुआ है. मोहंती बताते हैं कि भारत ने कपड़ा, चमड़ा, रत्न, और खाद्य उत्पादों जैसे श्रम-प्रधान क्षेत्रों में फुल मार्केट एक्सेस पाया है, जबकि संवेदनशील क्षेत्रों में ज्यादा रियायतें नहीं दीं.

एड्डहास लीगल एलएलपी के पार्टनर यथार्थ रोहिला कहते हैं, “यह समझौता भारत के लिए विकसित और नियम आधारित बाजार तक शुल्क-मुक्त पहुंच का रास्ता खोलता है. यह भारत के आत्मविश्वासी और व्यावहारिक वैश्विक दृष्टिकोण को दर्शाता है.”

यह FTA सिर्फ वस्तुओं तक सीमित नहीं है. इसमें सेवाओं की स्वतंत्रता, बौद्धिक संपदा सहयोग, फिनटेक और सतत खरीद जैसे मुद्दे भी शामिल हैं. रोहिला का कहना है कि, ‘ बौद्धिक संपदा पर यह समझौता जनरिक दवाओं को सुरक्षित रखता है और नवाचार को भी बढ़ावा देता है.’

निवेशकों में विश्वास बढ़ा

यह समझौता विदेशी निवेशकों के लिए भारत में व्यापार करने की राह को आसान बनाता है. विस लेजिस लॉ प्रैक्टिस के राहुल हिंगमिरे के अनुसार, ‘यह कर प्रणाली, अनुबंध प्रवर्तन और नियामक स्थिरता से जुड़ी चिंताओं को हल करता है. इससे खासतौर पर NRI निवेशकों और भारत-यूके ट्रेड चैनल को मजबूती मिलेगी.’

आज की भू-राजनीतिक परिस्थिति में FTA सिर्फ व्यापार नहीं, बल्कि रणनीतिक संकेत भी देते हैं. एकॉर्ड ज्यूरिस के अलाय रज़वी कहते हैं, ‘भारत-यूके समझौता आधुनिक व्यापार कूटनीति का उदाहरण है. यह दोनों देशों को एक-दूसरे के बाजारों तक प्राथमिकता के साथ पहुंच देता है.’

इस समझौते की खासियत इसका मजबूत IP अध्याय है, जो पहले अक्सर विवाद का कारण रहा है. अजय साहनी एंड एसोसिएट्स के अंकित साहनी बताते हैं, ‘इसमें ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों स्तरों पर IP सुरक्षा के बेहतर उपाय शामिल हैं.’

भविष्य की FTA का मॉडल

साहनी खासतौर पर GI (भौगोलिक संकेतक) पर प्रगति से उत्साहित हैं. “अब दार्जिलिंग चाय, बासमती चावल और पश्मीना ऊन जैसे उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय पहचान मिल सकती है. यह ग्रामीण अर्थव्यवस्था और सांस्कृतिक विरासत को मजबूती देगा.”

चुग का मानना है कि सततता और सार्वजनिक खरीद से जुड़े प्रावधान अक्षय ऊर्जा, ग्रीन हाइड्रोजन और कम कार्बन ढांचे में भारत-यूके सहयोग को बढ़ा सकते हैं. भारत अभी EU और अमेरिका के साथ भी समझौते की बातचीत कर रहा है, लेकिन कई मुद्दों पर मतभेद हैं. ऐसे में भारत-यूके FTA एक आदर्श समझौता बन सकता है.

ये भी पढ़ें: IMF ने वित्त वर्ष 26 और 27 के लिए भारत की GDP वृद्धि दर को रिवाइज कर 6.4 प्रतिशत किया

-भारत एक्सप्रेस 

निहारिका गुप्ता

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