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71 घंटे अंतरिक्ष में, 48 चक्कर पृथ्वी के… जानिए पहली महिला अंतरिक्ष यात्री की कहानी

First Female Astronaut: 16 जून 1963 का दिन अंतरिक्ष यात्रा के इतिहास में स्वर्णिम अक्षरों में दर्ज है. इस दिन सोवियत संघ ने वेलेंटीना तेरेश्कोवा (Valentina Tereshkova) को वोस्टोक-6 स्पेसक्राफ्ट के जरिए अंतरिक्ष में भेजा. वे दुनिया की पहली महिला बनीं, जिन्होंने अंतरिक्ष की यात्रा की.

सपनों को हकीकत में बदलने वाली महिला (Who is First Woman in Space?)

वेलेंटीना तेरेश्कोवा उस समय मात्र 26 साल की थीं. उन्होंने पैराशूट जंपिंग में पहले ही अपनी क्षमता साबित कर दी थी. उन्होंने 126 बार पैराशूट से छलांग लगाई थी, जिसकी वजह से वे काफी चर्चित हो चुकी थीं. जब सोवियत संघ ने अंतरिक्ष में पहली महिला भेजने की योजना बनाई, तो 400 से अधिक महिला उम्मीदवारों में से सिर्फ चार को चुना गया, जिनमें वेलेंटीना भी शामिल थीं. अगले 18 महीनों तक उन्होंने बेहद कठोर प्रशिक्षण लिया. अंत में 16 जून 1963 को वोस्टोक-6 से उन्हें अंतरिक्ष में भेजा गया.

उल्लेखनीय उपलब्धियां

– 71 घंटे तक वे अंतरिक्ष में रहीं, जो उस समय का सबसे लंबा अंतरिक्ष प्रवास था.
– उन्होंने पृथ्वी की कक्षा में 48 चक्कर लगाए.
– 19 जून 1963 को वे सफलतापूर्वक पृथ्वी पर वापस लौटीं.

वेलेंटीना ने लगभग 20,000 फीट की ऊंचाई से पैराशूट से छलांग लगाकर वापसी की. उनका पैराशूट जंपिंग का पूर्व अनुभव यहां काम आया.

रोचक तथ्य

इस मिशन से दो दिन पहले, यानी 14 जून को सोवियत संघ ने वोस्टोक-5 लॉन्च किया था, जिसमें वलेरी ब्यकोवस्की को भेजा गया था. दोनों स्पेसक्राफ्ट की कक्षाएं अलग-अलग होने के बावजूद एक समय वे एक-दूसरे के काफी करीब आ गए थे.वेलेंटीना की वापसी के कुछ घंटों बाद ही वलेरी भी पृथ्वी पर लौट आए.

निजी जीवन

अंतरिक्ष यात्रा के बाद 3 नवंबर 1963 को वेलेंटीना ने एंड्रियान निकोलायेव से शादी कर ली. निकोलायेव भी 1962 में अंतरिक्ष जा चुके थे. अगले साल दोनों को एक बेटी हुई, जिसका नाम एलेना रखा गया. एलेना दुनिया की पहली ऐसी बच्ची थीं, जिनके माता और पिता दोनों अंतरिक्ष यात्री थे.


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सम्मान

इस उपलब्धि के लिए वेलेंटीना को ऑर्डर ऑफ लेनिन और हीरो ऑफ सोवियत यूनियन जैसे प्रतिष्ठित सम्मानों से नवाजा गया. वेलेंटीना तेरेश्कोवा की यह यात्रा न सिर्फ सोवियत संघ की तकनीकी श्रेष्ठता का प्रतीक थी, बल्कि महिलाओं की क्षमता और साहस का भी अनुपम उदाहरण बनी. उन्होंने साबित कर दिया कि आकाश की कोई सीमा नहीं होती, न पुरुषों के लिए, न महिलाओं के लिए.

-भारत एक्सप्रेस

विशाल तिवारी, संपादकीय सलाहकार

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