बॉबी देओल को बनाया सुपरस्टार
Bollywood Director: जहां कई एक्टर फिल्मों में अपने स्टाइल के लिए मशहूर है वहीं कुछ डायरेक्टर्स ऐसे भी हैं जिनका अपना अलग ही स्टाइल है. जैसे विशाल सेट पर उनके पारंपरिक वेषभूशा देखकर ही लग जाता है कि ये फिल्म संजय लीला भंसाली की होगी. वहीं जब राजनीति से जुड़ी फिल्मों की बात आती है तो उस दौरान प्रकाश झा का कोई सीन मौजूदा समय में बॉलीवुड में दूर-दूर तक नजर नहीं आता है. प्रकाश झा ने अपने बड़े करियर में फिल्में कम ही बनाई हैं. उनमें से भी अधिकतर फिल्में या तो पॉलिटिकली इन्फ्ल्यूएंस्ड रही हैं या फिर उनमें सोशल इशूज पर बात की गई है. प्रकाश झा की फिल्मों में भी आपको कुछ ऐसा ही देखने को मिलेगा.
प्रकाश झा और अजय देवगन के बीच एक गहरी बॉन्डिंग देखने को मिली, जिसकी शुरुआत फिल्म गंगाजल से हुई थी. इसके बाद दोनों ने अपहरण, राजनीति और सत्याग्रह जैसी कई शानदार फिल्मों में साथ काम किया. इतना ही नहीं, प्रकाश झा की फिल्मों में अजय देवगन की केमियो अपीयरेंसेज भी जबरदस्त रही हैं. गंगाजल आज भी अजय देवगन के करियर के सबसे बड़े टर्निंग पॉइंट्स में से एक मानी जाती है.
एक दौर ऐसा भी आया जब बॉबी देओल का करियर ठहराव की स्थिति में पहुंच गया था. लेकिन प्रकाश झा के प्रोजेक्ट आश्रम में काम करके उन्होंने जबरदस्त वापसी की. इस सीरीज में बाबा निराला के किरदार में बॉबी देओल ने दर्शकों को बेहद खुश किया. अब, 27 फरवरी 2025 को प्रकाश झा के जन्मदिन के मौके पर आश्रम के तीसरे सीजन का दूसरा पार्ट भी स्ट्रीम होना शुरू हो चुका है.
प्रकाश झा ने अपने करियर में बंदिश, मृत्युदंड, गंगाजल, दिल क्या करे, दमुल, अपहरण, राजनीति, सत्याग्रह, चक्रव्यूह और परीक्षा जैसी बेहतरीन फिल्में बनाई हैं. उनकी फिल्में आम जनता को काफी पसंद आई हैं, खासकर वे फिल्में जो सामाजिक मुद्दों को दर्शाती हैं. हालांकि, उस समय इनमें से कुछ फिल्में बॉक्स ऑफिस पर अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पाईं, लेकिन आज भी गंगाजल और अपहरण युवाओं के बीच काफी लोकप्रिय हैं.
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अपने शानदार करियर के दौरान प्रकाश झा ने 8 नेशनल अवॉर्ड अपने नाम किए हैं. उन्हें ये अवॉर्ड्स अलग-अलग कैटेगरीज में मिले हैं, जिनमें बेस्ट फीचर फिल्म, बेस्ट नॉन-फीचर फिल्म, बेस्ट आर्ट फिल्म और डॉक्यूमेंट्री जैसी श्रेणियां शामिल हैं.
फिल्मों के अलावा प्रकाश झा समाजसेवा में भी सक्रिय हैं. वे अनुभूति नामक एनजीओ चलाते हैं, जो बिहार के पिछड़े इलाकों में जरूरतमंदों की सहायता करता है. खासतौर पर बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में यह एनजीओ काफी सक्रिय रहता है. इसकी स्थापना 1991 में हुई थी और 2008 में कोसी बाढ़ के दौरान इसने बड़े पैमाने पर राहत कार्य किए. तब से अब तक यह NGO 6000 से ज्यादा लोगों को शेल्टर और अन्य जरूरी सुविधाएं प्रदान करा चुके है.
-भारत एक्सप्रेस
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