सांकेतिक तस्वीर.
OBC Council Committee: सामाजिक न्याय हमेशा से एक केंद्रीय मुद्दा रहा है, खासकर जब बात पिछड़े वर्गों की होती है. अब कांग्रेस पार्टी ने इस दिशा में एक ठोस और संगठित पहल करते हुए ओबीसी एडवाइजरी कमेटी बनाने का ऐलान किया है. पिछले कुछ समय से पार्टी और राहुल गांधी का ध्यान इसी मुद्दे पर केंद्रित है
कांग्रेस पार्टी की इस कमेटी में पार्टी के दिग्गज ओबीसी नेताओं को शामिल किया जाएगा. कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया, छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल, राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, और पुद्दुचेरी के पूर्व मुख्यमंत्री वी. नारायणसामी जैसे नेताओं के नाम प्रमुख रूप से सामने आ रहे हैं. सूत्रों के अनुसार, इस कमेटी में कुल मिलाकर दो दर्जन से अधिक वरिष्ठ ओबीसी नेताओं को जगह दी जाएगी.
यह एडवाइजरी कमेटी कांग्रेस के ओबीसी विभाग को सलाह देने के साथ-साथ एक सुस्पष्ट रोडमैप तैयार करने में भी सहयोग करेगी. ओबीसी समाज के सामाजिक और आर्थिक सशक्तिकरण के उपाय सुझाना भी इसका काम होगा
कांग्रेस का मानना है कि ओबीसी समाज की उपेक्षा केवल आर्थिक या राजनीतिक ही नहीं, बल्कि संस्थागत और नीतिगत स्तर पर भी हुई है. ऐसे में यह कमेटी उन दरारों को पाटने की दिशा में मार्गदर्शक की भूमिका निभाएगी.
आगे कांग्रेस पार्टी ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि वह ओबीसी को संवैधानिक सुरक्षा दिलाने के मुद्दे को लेकर एक राष्ट्रव्यापी अभियान चलाने की योजना बना रही है. आज जहां अनुसूचित जातियों और जनजातियों को संविधान के तहत आरक्षण की गारंटी प्राप्त है, वहीं ओबीसी वर्ग को ऐसी कोई सुनिश्चित सुरक्षा नहीं मिली है.
कांग्रेस इसे सामाजिक न्याय और समानता के सिद्धांत के खिलाफ मानती है और इस स्थिति को बदलने के लिए संघर्ष तेज करने की तैयारी में है. पार्टी अब इस मुद्दे को न सिर्फ नीतिगत बहस का हिस्सा बनाना चाहती है, बल्कि जनांदोलन के रूप में खड़ा करने की योजना बना रही है.
कांग्रेस की यह पहल चुनावी दृष्टि से भी बेहद अहम मानी जा रही है. ओबीसी मतदाताओं की संख्या देश के कई राज्यों में निर्णायक है, और भाजपा ने इस वर्ग के बीच मजबूत आधार बनाया है. ऐसे में कांग्रेस की यह रणनीति ओबीसी वर्ग को फिर से अपने पक्ष में लाने का प्रयास भी है.
कांग्रेस की प्रस्तावित ओबीसी एडवाइजरी कमेटी केवल एक संगठनात्मक निर्णय नहीं है, बल्कि यह पार्टी के सामाजिक दृष्टिकोण और समावेशी राजनीति की ओर बढ़ते कदम है . यह देखना दिलचस्प होगा कि कांग्रेस की यह रणनीति आने वाले समय में कितनी प्रभावी सिद्ध होती है और किस हद तक यह देश की सामाजिक-राजनीतिक धारा को प्रभावित करती है.
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-भारत एक्सप्रेस
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