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‘अब तय होगी इंजीनियरों की सीधी जवाबदेही’ दिल्ली PWD में अलग कैडर को हरी झंडी, भर्तियों में मिलेगी पूरी स्वतंत्रता

Delhi PWD Reform: दिल्ली में लोक निर्माण विभाग (PWD) की इंजीनियरिंग व्यवस्था को लेकर बड़ा प्रशासनिक बदलाव होने जा रहा है. दिल्ली सरकार ने PWD के लिए अलग इंजीनियरिंग कैडर बनाने के प्रस्ताव को मंजूरी दी है. सरकार का कहना है कि नए कैडर से राजधानी में विकास और निर्माण परियोजनाओं को गति मिलेगी और इंजीनियरिंग अधिकारियों की जवाबदेही भी बेहतर तरीके से तय की जा सकेगी.

वर्तमान में दिल्ली PWD के इंजीनियरिंग विंग में 36 श्रेणियों के कुल 3,214 स्वीकृत पद हैं और ये पद केंद्रीय लोक निर्माण विभाग (CPWD) कैडर के अंतर्गत आते हैं. नई व्यवस्था का उद्देश्य दिल्ली को इंजीनियरिंग सेवाओं के मामले में अधिक आत्मनिर्भर बनाना है.

करीब 30 साल से लंबित था मामला

मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की अध्यक्षता में हुई दिल्ली कैबिनेट की बैठक में अलग इंजीनियरिंग कैडर बनाने का फैसला लिया गया था. मुख्यमंत्री ने इसे लंबे समय से लंबित प्रशासनिक सुधार बताते हुए कहा कि दिल्ली PWD अब तक अपने स्वतंत्र इंजीनियरिंग कैडर के बिना काम कर रहा था.

सरकार के मुताबिक, CPWD कैडर पर निर्भरता के कारण इंजीनियरों की नियुक्ति और प्रशासनिक जरूरतों से जुड़े फैसलों में दिल्ली की अपनी आवश्यकताओं के अनुरूप तुरंत कदम उठाने में दिक्कतें आती थीं. सरकार का मानना है कि अलग कैडर बनने के बाद इस व्यवस्था में बदलाव आएगा.

3,214 इंजीनियरिंग पद नए कैडर में होंगे

दिल्ली PWD के इंजीनियरिंग विंग में फिलहाल 36 अलग-अलग श्रेणियों में 3,214 स्वीकृत पद हैं. ये पद अभी CPWD कैडर से जुड़े हुए हैं और नियुक्तियां केंद्र सरकार की व्यवस्था के तहत होती रही हैं.

नई व्यवस्था लागू होने के बाद दिल्ली सरकार को इंजीनियरों की भर्ती और रिक्त पदों को भरने में अधिक स्वतंत्रता मिलने की उम्मीद है. सरकार ने नए कैडर के ढांचे और उसके संचालन से जुड़े पहलुओं को तय करने के लिए एक उच्चस्तरीय समिति बनाने की भी बात कही थी.

नए सचिवालय से मिनी सचिवालय तक कई प्रोजेक्ट

दिल्ली सरकार आने वाले समय में कई बड़े निर्माण और इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट आगे बढ़ाने की तैयारी में है. इनमें नया सचिवालय, दिल्ली के सभी 11 जिलों में मिनी सचिवालय, मंडियां, खेल परिसरों और अन्य प्रशासनिक सुविधाओं से जुड़े निर्माण कार्य शामिल हैं.

सरकार का तर्क है कि इन परियोजनाओं के साथ-साथ सड़कों, पुलों और अन्य सार्वजनिक बुनियादी ढांचे के निर्माण एवं रखरखाव के लिए मजबूत इंजीनियरिंग तंत्र जरूरी है. ऐसे में अलग कैडर को प्रशासनिक क्षमता मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है.

अधिकारियों की जवाबदेही बढ़ाने पर जोर

अलग इंजीनियरिंग कैडर बनाने के पीछे सरकार ने जवाबदेही को भी प्रमुख वजह बताया है. मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के मुताबिक, पहले इंजीनियरों की पोस्टिंग और ट्रांसफर की व्यवस्था अलग कैडर से जुड़ी होने के कारण विकास कार्यों में जिम्मेदारी तय करने में चुनौतियां आती थीं.

सरकार का दावा है कि नए कैडर के जरिए इंजीनियरिंग अधिकारियों की जिम्मेदारियों और उनके काम की निगरानी को दिल्ली सरकार की प्रशासनिक व्यवस्था से अधिक प्रभावी ढंग से जोड़ा जा सकेगा. इससे निर्माण कार्यों की गति, गुणवत्ता और पारदर्शिता में सुधार की उम्मीद है.

शुरुआती चरण में CPWD अधिकारियों को मिल सकता है विकल्प

प्रस्तावित व्यवस्था के तहत शुरुआती चरण में दिल्ली PWD में काम कर रहे ऐसे CPWD अधिकारियों को नए कैडर में शामिल करने की व्यवस्था पर भी विचार किया गया है, जो इसके लिए इच्छुक हों. अगर जरूरत के मुताबिक संख्या पूरी नहीं होती है तो आगे वैकल्पिक भर्ती व्यवस्था अपनाने का विकल्प रखा गया है. इसके लिए सक्षम प्राधिकारी की मंजूरी और समिति की सिफारिशों को आधार बनाया जाएगा.

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मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने इस फैसले को दिल्ली के इंफ्रास्ट्रक्चर और प्रशासनिक व्यवस्था को मजबूत करने वाला कदम बताया है. सरकार का कहना है कि स्वतंत्र इंजीनियरिंग कैडर के जरिए दिल्ली की स्थानीय जरूरतों के अनुरूप तकनीकी मानव संसाधन तैयार करने और विकास परियोजनाओं को अधिक प्रभावी ढंग से आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी.

भारत एक्सप्रेस के लिए स्कंदिता मिश्रा की रिपोर्ट

Govind Kumar Singh

मैं गोविंद सिंह हूं और मूल रूप से बिहार के कैमूर की पहाड़ियों वाले इलाके से आता हूं। मेरी शुरुआती पढ़ाई-लिखाई वाराणसी के उदय प्रताप कॉलेज से हुई। इसके बाद मैंने पटना कॉलेज, पटना से मास कम्यूनिकेशन में ग्रेजुएशन किया। पढ़ाई पूरी करने के बाद मैंने पत्रकारिता के क्षेत्र में अपने करियर की शुरुआत की और अलग-अलग संस्थानों में काम करते हुए खबरों की दुनिया को करीब से समझा। अपने पेशेवर सफर में मुझे ईटीवी भारत, इनशॉर्ट्स और श्यामा प्रसाद मुखर्जी रिसर्च फाउंडेशन जैसे संस्थानों के साथ काम करने का अवसर मिला। इन जगहों पर काम करते हुए मैंने रिपोर्टिंग, कंटेंट लेखन, रिसर्च और समाचारों की प्रस्तुति से जुड़ी कई महत्वपूर्ण बातें सीखीं। फिलहाल मैं भारत एक्सप्रेस में सब एडिटर के तौर पर कार्यरत हूं। यहां मेरी मुख्य रुचि विदेश, राजनीति और बिहार से जुड़ी खबरों को कवर करने में है।

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