Earth Day 2026 PM Modi Message: आज जब पूरी दुनिया जलवायु परिवर्तन और बढ़ते प्रदूषण की चुनौतियों से जूझ रही है, विश्व पृथ्वी दिवस 2026 के मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक ऐसा संदेश दिया है जो हमारी प्राचीन जड़ों को आधुनिक भविष्य से जोड़ता है. पीएम मोदी ने पृथ्वी को मात्र एक ग्रह नहीं बल्कि ‘माता’ के रूप में संबोधित करते हुए कहा कि इसके संरक्षण में ही संपूर्ण मानवता का कल्याण छिपा है. उन्होंने स्पष्ट किया कि धरती की रक्षा करना हमारा केवल नैतिक दायित्व नहीं है बल्कि आने वाली पीढ़ियों के प्रति हमारा एक अत्यंत पवित्र संकल्प भी है.
प्रधानमंत्री ने अपने संदेश की शुरुआत भारतीय संस्कृति की उस गहरी पर्यावरण चेतना से की, जहाँ प्रकृति को पूजा जाता है. उन्होंने अथर्ववेद का एक प्राचीन श्लोक साझा किया, जिसका भाव यह है कि जिस पृथ्वी पर वृक्ष और वनस्पतियां सदा अडिग रहती हैं और जो कामधेनु के समान हमारी सभी इच्छाओं की पूर्ति करती है, उस पृथ्वी माता को हम नमन करते हैं. पीएम ने इस श्लोक के माध्यम से दुनिया को याद दिलाया कि भारत के लिए पर्यावरण संरक्षण कोई नया एजेंडा नहीं बल्कि हजारों सालों पुरानी परंपरा है.
इस साल विश्व पृथ्वी दिवस की थीम ‘Our Power, Our Planet’ रखी गई है. पीएम मोदी का संदेश इस वैश्विक सोच के साथ भारत के ‘मिशन LiFE’ (Lifestyle for Environment) को जोड़ता है. प्रधानमंत्री ने जोर देकर कहा कि सतत विकास (Sustainable Development) का रास्ता ही हमें विनाश से बचा सकता है. भारत सरकार के नमामि गंगे, जल जीवन मिशन और स्वच्छ भारत जैसे अभियान इसी दिशा में काम कर रहे हैं, ताकि हम एक ऐसा भविष्य बना सकें जहाँ विकास और प्रकृति के बीच संतुलन बना रहे.
पीएम मोदी ने अपने संदेश में यह कड़ा संदेश भी दिया कि पृथ्वी की रक्षा केवल सरकारी योजनाओं या सम्मेलनों से संभव नहीं है. उन्होंने हर नागरिक से व्यक्तिगत स्तर पर सक्रिय होने की भावुक अपील की. पीएम के अनुसार, छोटे-छोटे कदम जैसे कि एक पेड़ लगाना, प्लास्टिक का त्याग करना, बिजली और पानी की बचत करना और प्रकृति के साथ तालमेल बिठाकर जीना ही असली ‘पृथ्वी सेवा’ है. उन्होंने कहा कि जब तक हर नागरिक इस पवित्र संकल्प का हिस्सा नहीं बनेगा, तब तक एक हरित भारत का सपना अधूरा है.
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अंत में प्रधानमंत्री ने विश्वास जताया कि भारत अपनी प्राचीन वैदिक परंपराओं और आधुनिक पर्यावरण विज्ञान को साथ लेकर दुनिया के लिए एक उदाहरण पेश करेगा. उन्होंने नागरिकों को प्रेरित किया कि वे अपनी जीवनशैली को इस तरह ढालें कि हम धरती मां से उतना ही लें जितना उसे वापस दे सकें. यह संदेश न केवल आज के दिन के लिए है, बल्कि एक समृद्ध और स्वस्थ धरती की ओर बढ़ने के लिए एक आजीवन ब्लूप्रिंट की तरह काम करेगा.
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-भारत एक्सप्रेस
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