PMO Monsoon Meeting
PMO Monsoon Meeting: खरीफ फसलों की मौजूदा स्थिति और अल नीनो के संभावित प्रभाव को देखते हुए मंगलवार को प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव डॉ. पी. के. मिश्रा की अध्यक्षता में सेवा तीर्थ में उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित की गई. बैठक में कृषि, बिजली, पेयजल, स्वास्थ्य, ग्रामीण विकास, मौसम विभाग, जल संसाधन, उपभोक्ता मामले, उर्वरक, वित्तीय सेवाएं समेत 15 से अधिक मंत्रालयों और विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों ने हिस्सा लिया.
बैठक की शुरुआत में भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने जून से लेकर 7 जुलाई तक की वर्षा की स्थिति और मानसून की प्रगति पर विस्तृत जानकारी दी. अधिकारियों ने बताया कि गुजरात, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र में मानसून लगभग 10 दिन की देरी से पहुंचा था. हालांकि जुलाई के पहले सप्ताह में अच्छी बारिश होने से देशभर में वर्षा की कमी घटकर लगभग 12 प्रतिशत रह गई है. मौसम विभाग के अनुसार जुलाई और अगस्त के दौरान कमजोर से मध्यम स्तर का अल नीनो प्रभाव देखने को मिल सकता है, लेकिन केवल अल नीनो की मौजूदगी का अर्थ यह नहीं है कि पूरे देश में सामान्य से कम बारिश ही होगी. सरकार मानसून की स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है क्योंकि जुलाई का महीना पूरे मानसून सीजन का सबसे महत्वपूर्ण दौर माना जाता है और इसी दौरान सबसे अधिक वर्षा होती है.
कृषि मंत्रालय ने बैठक में बताया कि संभावित चुनौती से निपटने के लिए राज्यों के साथ हर सप्ताह क्रॉप वेदर वॉच ग्रुप की बैठकें आयोजित की जा रही हैं. इनमें वर्षा, जलाशयों का जलस्तर, फसल बुवाई, बीज और उर्वरक की उपलब्धता, बाजार की स्थिति तथा कीट एवं रोगों की निगरानी की जा रही है ताकि समय रहते आवश्यक निर्णय लिए जा सकें.
इसके अलावा 262 संवेदनशील जिलों के लिए जिला स्तरीय कृषि आकस्मिक योजना (कंटीजेंसी प्लान) को अपडेट किया गया है. भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) ने कृषि विज्ञान केंद्रों के लिए ‘अल नीनो जोखिम प्रबंधन’ संबंधी मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) भी जारी की है. बैठक में यह भी बताया गया कि पिछले वर्षों में कम वर्षा की परिस्थितियों के बावजूद जलवायु अनुकूल बीजों और नई कृषि तकनीकों की मदद से खाद्यान्न उत्पादन को बनाए रखने में सफलता मिली है.
सरकार ने निर्देश दिए कि जिन राज्यों में वर्षा को लेकर जोखिम अधिक है, वहां प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना और किसान क्रेडिट कार्ड का दायरा तेजी से बढ़ाया जाए ताकि अधिक से अधिक किसानों को समय पर सुरक्षा और वित्तीय सहायता मिल सके. कृषि, वित्तीय सेवाएं और सहकारिता विभाग को इस दिशा में अभियान तेज करने के निर्देश दिए गए.
पशुपालन एवं डेयरी विभाग को निर्देश दिया गया कि देशभर में सूखे चारे, हरे चारे और पशु आहार की उपलब्धता का राज्य और जिला स्तर तक आकलन किया जाए. जरूरत पड़ने पर समय रहते वैकल्पिक व्यवस्था सुनिश्चित करने की भी बात कही गई.
जल शक्ति मंत्रालय के तहत पेयजल एवं स्वच्छता विभाग ने बताया कि फिलहाल स्थिति सामान्य है, लेकिन संवेदनशील जिलों में सूक्ष्म स्तर पर निगरानी जारी रहेगी. वहीं जल संसाधन विभाग ने भूजल और जलाशयों की स्थिति की जानकारी देते हुए कहा कि अभी हालात संतोषजनक हैं, फिर भी पूरे मानसून के दौरान लगातार निगरानी जरूरी होगी.
प्रधान सचिव ने स्पष्ट निर्देश दिए कि संवेदनशील जिलों में पेयजल की उपलब्धता सर्वोच्च प्राथमिकता रहे. साथ ही जलाशयों के पानी का वैज्ञानिक और संतुलित उपयोग सुनिश्चित किया जाए तथा उपलब्ध जल का विवेकपूर्ण इस्तेमाल बढ़ाने के लिए राज्यों के साथ मिलकर काम किया जाए.
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने बताया कि लू, अधिक आर्द्रता और डेंगू जैसी मौसमी बीमारियों को लेकर आवश्यक एडवाइजरी जारी कर दी गई हैं. राज्यों और जिला प्रशासन को निर्देश दिए गए हैं कि सभी चेतावनियां और स्वास्थ्य संबंधी सलाह गांव और स्थानीय स्तर तक प्रभावी ढंग से पहुंचाई जाएं.
खाद्यान्न, उर्वरक और आवश्यक वस्तुओं की पर्याप्त उपलब्धता
उपभोक्ता मामले विभाग ने बताया कि चावल, गेहूं और दालों का पर्याप्त बफर स्टॉक उपलब्ध है और खुदरा कीमतों पर लगातार नजर रखी जा रही है. उर्वरक विभाग ने भी खरीफ और आगामी रबी सीजन के लिए उर्वरकों की पर्याप्त उपलब्धता का भरोसा दिलाया. दोनों विभागों को निर्देश दिए गए कि किसी भी क्षेत्र में कमी की स्थिति बनने से पहले आवश्यक कदम उठाए जाएं.
ग्रामीण विकास मंत्रालय ने जानकारी दी कि 1 जुलाई से विकसित भारत–गारंटी फॉर रोजगार एवं आजीविका मिशन के तहत कार्य शुरू हो चुके हैं और अब तक लगभग 1 करोड़ मानव-दिवस (Person Days) का रोजगार सृजित किया जा चुका है. वहीं कृषि अनुसंधान एवं शिक्षा विभाग ने जलवायु अनुकूल बीजों के प्रसार की स्थिति बताई और बिजली मंत्रालय ने बिजली उत्पादन एवं आपूर्ति की समीक्षा प्रस्तुत की.
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बैठक के अंत में डॉ. पी. के. मिश्रा ने सभी मंत्रालयों को निर्देश दिए कि मानसून और अल नीनो की स्थिति पर लगातार नजर रखी जाए तथा राज्यों के साथ बेहतर समन्वय बनाकर संवेदनशील जिलों में समय रहते आवश्यक कदम उठाए जाएं. उन्होंने कहा कि चारे की उपलब्धता, पेयजल, जलाशयों के प्रबंधन, कृषि और आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति जैसे सभी मुद्दों पर केंद्र और राज्य सरकारों को मिलकर काम करना होगा ताकि किसी भी संभावित चुनौती का प्रभावी ढंग से सामना किया जा सके.
-भारत एक्सप्रेस
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