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साहब! ट्रांसफार्मर कब लगेगा? वन विभाग और नगर पालिका के झगड़े में गरियाबंद के आउटडोर स्टेडियम की ‘बत्ती गुल’

रिपोर्ट- लोकेश


गरियाबंद नगर का आउटडोर स्टेडियम इन दिनों गंभीर लापरवाही और प्रशासनिक खींचतान की वजह से खामोशी का शिकार बना हुआ है. जिस जगह पर कभी खिलाड़ियों की आवाजाही और फिटनेस की तैयारी देखने को मिलती थी, वहां अब अंधेरा रहता है.

करीब दो साल पहले राज्य सरकार की ओर से खिलाड़ियों की सुविधा के लिए इस स्टेडियम में चार फ्लड लाइट लगाने की मंजूरी दी गई थी. उद्देश्य था कि शाम के समय भी खिलाड़ी आराम से अभ्यास कर सकें, खासकर वे युवा जो पुलिस या फोर्स की भर्ती की तैयारी कर रहे हैं. लेकिन हकीकत यह है कि आज तक ये लाइटें चालू ही नहीं हो पाईं.

स्थानीय खिलाड़ियों का कहना है कि अंधेरा होने से पहले ही उन्हें स्टेडियम छोड़ना पड़ता है. स्टेडियम शहर से बाहर बना हुआ है और पीछे की तरफ जंगल जैसा इलाका है, जहां कई बार तेंदुआ और भालू जैसे जंगली जानवर देखे जाने की बात सामने आती रही है. ऐसे में अंधेरा होने के बाद वहां रुकना जोखिम भरा हो जाता है.

सुरक्षा और असामाजिक गतिविधियों की चिंता

शाम ढलते ही यह इलाका पूरी तरह सुनसान हो जाता है और कई बार असामाजिक तत्वों के यहां जमा होने की शिकायतें भी सामने आती हैं. स्थानीय लोगों का कहना है कि कुछ युवक यहां बैठकर नशा भी करते हैं, जिससे स्टेडियम का माहौल और खराब होता जा रहा है. खिलाड़ियों के लिए जो जगह अभ्यास का केंद्र होनी चाहिए थी, वह अब चिंता का कारण बनती जा रही है.

जांच में सामने आया है कि आउटडोर और इंडोर स्टेडियम के लिए DMF फंड से करीब एक करोड़ रुपये की राशि स्वीकृत हुई थी. इस काम की जिम्मेदारी वन विभाग को सौंपी गई थी. शुरुआत में विभाग ने कुछ काम किए भी, जैसे आउटडोर स्टेडियम में चार फ्लड लाइट और इंडोर में कुछ लाइटें लगाई गईं.

लेकिन सबसे अहम काम, यानी करीब डेढ़ से दो लाख रुपये का ट्रांसफार्मर लगाना, आज तक पूरा नहीं हो सका. इसी वजह से पूरी लाइटिंग व्यवस्था पिछले दो सालों से बंद पड़ी है.

अब स्थिति यह है कि वन विभाग इस अधूरे काम को नगर पालिका को सौंपना चाहता है, जबकि नगर पालिका का कहना है कि उनके पास ट्रांसफार्मर लगाने के लिए अलग से बजट नहीं है. साथ ही नगर पालिका यह भी सवाल उठा रही है कि जब पूरा फंड वन विभाग को दिया गया था, तो काम अधूरा क्यों छोड़ा गया.

इस पूरे विवाद और विभागीय खींचतान का सीधा असर स्थानीय खिलाड़ियों पर पड़ रहा है. कई युवा खिलाड़ियों ने बताया कि उनकी ट्रेनिंग बाधित हो रही है और उन्हें समय से पहले अभ्यास रोकना पड़ता है.

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-भारत एक्सप्रेस

Shreyansh Choubey

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