Jagannath Rath Yatra 2025: मशहूर उद्योगपति और अडानी समूह के अध्यक्ष गौतम अडानी ने परिवार के साथ ने शुक्रवार, 27 जून को ओडिशा के पुरी में आयोजित विश्वप्रसिद्ध रथ यात्रा में शामिल हुए. यह पर्व हिंदू धर्म के सबसे महत्वपूर्ण उत्सवों में से एक है, जिसमें हर साल करोड़ों श्रद्धालु भगवान जगन्नाथ के दर्शन करने पुरी पहुंचते हैं. उन्होंने भगवान जगन्नाथ, भगवान बलभद्र और देवी सुभद्रा की शोभायात्रा के दौरान पारंपरिक रीति-रिवाजों का पालन किया.
अडानी ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर कई तस्वीरें साझा कीं, जिनमें वे अपनी पत्नी और परिवार के साथ पारंपरिक वेशभूषा में हाथों से भगवान के रथ को निहारते नजर आए. उनके सिर पर छाता था और चारों ओर श्रद्धालुओं का विशाल सागर उमड़ा हुआ था. रथ यात्रा में भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा के सजीव रूपों को गुंडिचा मंदिर की ओर ले जाया गया, जहां वे हर साल कुछ दिनों तक विश्राम करते हैं. यह अनूठी परंपरा सैकड़ों वर्षों से चली आ रही है.
अपने भावुक पोस्ट में अडानी ने लिखा, “भक्तों के बीच साक्षात प्रभु के दर्शन करना विनम्रता, सरलता और करुणा की पराकाष्ठा है.” उन्होंने रथ यात्रा को आस्था, सेवा और एकता का अनुपम उदाहरण बताते हुए कहा कि यह अनुभव उनके जीवन पर अमिट छाप छोड़ गया.
इस अवसर पर अडानी ने रथ यात्रा के दौरान लगने वाले विशाल भंडारे में भी भाग लिया. उन्होंने रसोईघर में प्रसाद बनाने और बांटने में स्वयं हाथ बंटाया. तस्वीरों में वे एक बड़े कड़ाह में भोजन पकाते और रोटियां बेलते दिखे. उन्होंने इसे “सेवा ही साधना” बताते हुए कहा कि समाज की सेवा ही सच्ची भक्ति है.
साथ ही उन्होंने ओडिशा सरकार, पुरी प्रशासन और आयोजन में जुटे हजारों कर्मियों का आभार प्रकट किया, जिनके अथक प्रयास से यह ऐतिहासिक आयोजन भव्य और सुव्यवस्थित ढंग से संपन्न हो सका. अडानी ने प्रार्थना की, “महाप्रभु की कृपा ओडिशा, पूरे भारत और सभी भारतीयों पर सदैव बनी रहे.”
अडानी की पोस्ट ने सोशल मीडिया पर खासा ध्यान खींचा. हजारों लोगों ने “जय जगन्नाथ” के संदेश लिखकर अपनी श्रद्धा व्यक्त की, तो कई प्रशंसकों ने उनकी सादगी और विनम्रता की तारीफ की. रथों की रंग-बिरंगी झांकियों और अडानी की सेवा की तस्वीरें देखते ही देखते वायरल हो गईं और पुरी के आयोजन की भव्यता दूर-दूर तक फैल गई.
आपको बता दें पर्व अषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को निकाली जाने वाली यह रथ यात्रा स्कंद पुराण में वर्णित बारह रथ यात्राओं में सबसे महान मानी जाती है. इस वर्ष 27 जून को हुए आयोजन में देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु पुरी पहुंचे. भगवान के रथों की यात्रा उनके मौसी के मंदिर तक जाती है, जो समर्पण और उत्साह का अद्वितीय प्रतीक है. अडानी की उपस्थिति ने इस पर्व में आध्यात्मिकता के साथ-साथ आधुनिकता का भी समावेश कर दिया.
-भारत एक्सप्रेस
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