GST Reform Compliance Refund Process- AI Generated
GST Reform Compliance Refund Process: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को कहा कि वस्तु एवं सेवा कर (GST) सुधारों का अगला चरण कारोबारियों के लिए अनुपालन प्रक्रिया को और आसान बनाएगा. साथ ही, रिफंड की प्रक्रिया को सरल और तेज किया जाएगा। सरकार का मानना है कि इन सुधारों से उद्योग जगत का भरोसा बढ़ेगा, निवेश को प्रोत्साहन मिलेगा और ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य को मजबूती मिलेगी.
प्रधानमंत्री ने वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के उस लेख का उल्लेख करते हुए यह बात कही, जिसमें उन्होंने अगले चरण के GST सुधारों की रूपरेखा पेश की है. पीएम मोदी ने कहा कि नई पीढ़ी के GST सुधार कर प्रणाली को अधिक सरल, पारदर्शी और पूर्वानुमान योग्य बना रहे हैं. उन्होंने कहा कि इसका लाभ कारोबारियों के साथ-साथ आम परिवारों को भी मिल रहा है. सरकार का जोर ऐसी कर व्यवस्था बनाने पर है, जिसमें अनुपालन का बोझ कम हो और कारोबार करना आसान बने.
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर कहा कि नेक्स्ट-जेन GST सुधारों का उद्देश्य करदाताओं को राहत देने के साथ अर्थव्यवस्था को गति देना है.
आगामी सुधारों में मुख्य रूप से इन क्षेत्रों पर ध्यान दिया जाएगा:
GST रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया को आसान बनाना
रिटर्न फाइलिंग को सरल करना
रिफंड प्रक्रिया को तेज और सुविधाजनक बनाना
विवादों के निपटारे की प्रक्रिया को आसान करना
इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) से जुड़ी प्रक्रियाओं को सरल बनाना
GST परिषद की 7 अक्टूबर को होने वाली बैठक से पहले वित्त मंत्री ने अपने लेख में कहा कि प्रस्तावित प्रक्रिया सुधारों का मुख्य उद्देश्य करदाताओं के अनुपालन में लगने वाले समय और लागत को कम करना है. सरकार चाहती है कि कारोबारियों को कम कागजी कार्रवाई करनी पड़े और उन्हें कर व्यवस्था में अधिक सुविधा मिले. इससे कारोबारी माहौल बेहतर होने और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है.
वित्त मंत्री ने सितंबर 2025 में लागू हुई GST दरों के युक्तिकरण के बाद GST संग्रह और कर योग्य आपूर्ति के प्रदर्शन का भी उल्लेख किया. सरकार का मानना है कि GST ने न केवल राजस्व संग्रह को मजबूत किया है, बल्कि आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है. अब अगले चरण के सुधारों के जरिए व्यवस्था को और अधिक सरल और प्रभावी बनाने की तैयारी है.
इस बीच, आगामी GST परिषद की बैठक में एक महत्वपूर्ण कानूनी मुद्दे पर भी चर्चा होने की संभावना है. सूत्रों के अनुसार, परिषद GST कानून में मौजूद उस प्रावधान की समीक्षा कर सकती है, जिसके तहत जांच के दौरान कर अधिकारियों को करदाताओं की गिरफ्तारी का अधिकार प्राप्त है. यह सुझाव GST परिषद की लॉ कमेटी की ओर से GST कानूनों के अपराधमुक्तिकरण यानी decriminalisation से जुड़े व्यापक प्रस्तावों के तहत दिया गया है.
लॉ कमेटी का मानना है कि कई मामलों में कर भुगतान में हुई चूक जानबूझकर नहीं होती. ऐसे मामलों में गिरफ्तारी जैसे कठोर कदम उठाने की आवश्यकता नहीं होनी चाहिए. वर्तमान व्यवस्था के तहत CGST अधिनियम की धारा 69 के अनुसार, यदि आयुक्त को यह विश्वास हो कि किसी व्यक्ति ने धारा 132 के तहत गंभीर अपराध किया है, तो वह उसकी गिरफ्तारी की अनुमति दे सकता है. हालांकि, प्रस्तावित बदलावों के तहत फर्जी चालान, फर्जी इनपुट टैक्स क्रेडिट और फर्जी रिफंड दावों जैसे गंभीर मामलों में कार्रवाई भारतीय न्याय संहिता (BNS) समेत सामान्य आपराधिक कानूनों के तहत किए जाने पर विचार हो सकता है.
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सरकार और लॉ कमेटी की सोच है कि गैर-इरादतन कर चूक और गंभीर आर्थिक धोखाधड़ी के मामलों में अंतर किया जाना चाहिए. इससे ईमानदार करदाताओं को अनावश्यक कानूनी कार्रवाई से राहत मिल सकती है और कारोबारी माहौल अधिक सहज बनाया जा सकता है. GST परिषद की लॉ कमेटी में केंद्र और राज्यों के अधिकारी शामिल होते हैं. यह समिति GST कानूनों की कानूनी समीक्षा कर परिषद को आवश्यक संशोधनों और स्पष्टीकरणों की सिफारिश करती है. आगामी GST परिषद की बैठक में प्रक्रिया सुधारों के साथ-साथ गिरफ्तारी संबंधी प्रावधान पर होने वाली चर्चा भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है.
भारत एक्सप्रेस
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