हिमाचल प्रदेश का 'सिंदूरी अनार'
हिमाचल प्रदेश का प्रसिद्ध ‘सिंदूरी अनार’ दुनिया के कई फ्रूट मार्केट्स में लोगों को गजब की मिठास देगा, भारतीय फल और सब्जियां अब कई और देशों में पहुंच रही हैं और इनकी बिक्री में जबरदस्त बढ़त देखी जा रही है. भारतीय कृषि निर्यात को नई उड़ान देते हुए हिमाचल प्रदेश के कुल्लू जिले में उपजे उच्च गुणवत्ता वाले 1.3 मीट्रिक टन ‘सिंदूरी अनार’ का दुबई में सफलतापूर्वक निर्यात किया गया है.
केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने इस उपलब्धि की जानकारी देते हुए बताया कि एग्रीकल्चरल एंड प्रोसेस्ड फूड प्रोडक्ट्स एक्सपोर्ट डेवलपमेंट अथॉरिटी (एपीडा) के सहयोग से यह खेप दुबई भेजी गई है. उन्होंने कहा कि स्थानीय किसानों की उपज को वैश्विक फल बाजारों से सीधे जोड़ने की यह पहल न केवल बागवानों की आमदनी बढ़ाने में मील का पत्थर साबित होगी, बल्कि भारतीय कृषि निर्यात को वैश्विक फलक पर नई ऊंचाइयों तक ले जाएगी.
हिमाचल प्रदेश की ठंडी और अनुकूल जलवायु में तैयार होने वाला ‘सिंदूरी अनार’ अपने गहरे सिंदूरी-लाल रंग, चमकदार छिलके और अत्यधिक रसदार दानों के लिए पहचाना जाता है.
आकार और वजन: गुणवत्ता के आधार पर इसके फल काफी बड़े होते हैं, जिनका वजन 400-500 ग्राम से लेकर कई बार 800 ग्राम से 1 किलोग्राम तक पहुंच जाता है.
मुलायम बीज और मिठास: इसके दाने गहरे रूबी लाल होते हैं और इनके बीज बेहद मुलायम (सॉफ्ट-सीडेड) होते हैं, जिससे इन्हें चबाना और इनका ताजा जूस निकालना बहुत आसान होता है. इसमें प्राकृतिक मिठास और एंटीऑक्सीडेंट्स की मात्रा भरपूर होती है, जिसके चलते दुबई और खाड़ी देशों के प्रीमियम फ्रूट मार्केट्स में इसकी भारी मांग निकल रही है.
भारत दुनिया में अनार का सबसे बड़ा उत्पादक देश है. देश के विभिन्न राज्यों में भौगोलिक परिस्थितियों के आधार पर अनार की कई लोकप्रिय किस्में उगाई जाती हैं:
भगवा (सिंदूरी): यह देश की सबसे लोकप्रिय और निर्यात की जाने वाली प्रमुख किस्म है, जिसे महाराष्ट्र, गुजरात और अब हिमाचल के कुछ क्षेत्रों में प्रमुखता से उगाया जाता है.
गणेश: हल्के गुलाबी दानों और बहुत ही मीठे स्वाद वाली पुरानी और भरोसेमंद किस्म.
आरक्ता: गहरे लाल रंग के दाने और बड़े आकार का फल.
मृदुला: गहरे लाल दानों के साथ अत्यंत मुलायम बीज वाली लोकप्रिय किस्म.
कंधारी और ढोलका: उत्तरी और पश्चिमी भारत में प्रचलित स्वादिष्ट किस्में.
भारतीय खाद्य उत्पादों की वैश्विक पहुंच केवल ताजे फलों तक सीमित नहीं है. इस महीने की शुरुआत में एपीडा ने हरियाणा के सोनीपत से किसान उत्पादक संगठनों (FPO) के नेतृत्व में 24 मीट्रिक टन फ्रोजन उत्पादों की खेप कनाडा भेजी, जिसमें हरी मटर, गाजर, स्वीट कॉर्न और पारंपरिक समोसे शामिल थे.
केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने बताया कि भारत द्वारा विभिन्न देशों के साथ किए गए मुक्त व्यापार समझौतों (FTA) का लाभ जमीनी स्तर पर पहुंचाने के लिए राज्य सरकारों के साथ मिलकर आउटरीच कार्यशालाएं आयोजित की जा रही हैं. हाल ही में गुजरात के गांधीनगर में आयोजित कार्यशाला में 200 से अधिक निर्यातकों ने भाग लिया. उन्होंने गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल और गोवा के मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत के उन प्रयासों की भी सराहना की, जिनके जरिए स्थानीय व्यवसायों, युवाओं और किसानों को ‘मेड इन इंडिया’ उत्पादों के निर्यात के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है.
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