India Switzerland Relations Agreements
India Switzerland Relations Agreements: भारत और स्विट्जरलैंड ने अपने द्विपक्षीय रिश्तों को व्यापार और निवेश से आगे ले जाते हुए लोगों की आवाजाही, युवा पेशेवरों, परिवहन तकनीक, वैज्ञानिक अनुसंधान और स्टार्टअप जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई है. स्विस राष्ट्रपति गाइ परमेलिन की भारत यात्रा के दौरान दोनों देशों के बीच पांच महत्वपूर्ण समझौतों और सहयोग से जुड़े दस्तावेजों पर सहमति बनी. विदेश मंत्रालय (MEA) के अनुसार, इन समझौतों का उद्देश्य दोनों देशों के बीच सहयोग को व्यापक बनाना और आर्थिक साझेदारी के साथ-साथ लोगों से लोगों के संपर्क, तकनीक और इनोवेशन को मजबूत करना है.
दोनों देशों के बीच हुए महत्वपूर्ण समझौतों में माइग्रेशन एंड मोबिलिटी पार्टनरशिप (MMP) प्रमुख है. इसका उद्देश्य भारत और स्विट्जरलैंड के बीच सुरक्षित और व्यवस्थित तरीके से लोगों की आवाजाही को बढ़ावा देना है. समझौते में अनियमित प्रवासन, मानव शोषण और मानव तस्करी को रोकने के लिए सहयोग बढ़ाने का प्रावधान है. इसके तहत पांच साल तक की अवधि के लिए मल्टीपल-एंट्री वीजा की सुविधा का प्रावधान किया गया है. प्रत्येक यात्रा के दौरान छह महीने तक रहने की अनुमति दी जा सकेगी. इसके अलावा छात्रों के लिए एक साल की अवधि वाले नवीकरणीय परमिट की व्यवस्था भी प्रस्तावित है.
भारत और स्विट्जरलैंड ने युवा पेशेवरों के आदान-प्रदान के लिए यंग प्रोफेशनल्स स्कीम (YPS) पर भी सहमति जताई है. इसके तहत दोनों देशों के युवा पेशेवर सीमित अवधि के लिए दूसरे देश में काम कर सकेंगे. इसका उद्देश्य युवाओं को अपने पेशेवर क्षेत्र में अनुभव हासिल करने के साथ भाषा और व्यावहारिक कौशल विकसित करने का अवसर देना है. योजना के तहत हर साल दोनों देशों से 300-300 युवा पेशेवरों के आदान-प्रदान का प्रावधान होगा. जरूरत और आपसी सहमति के आधार पर यह संख्या बढ़ाकर 500 तक की जा सकती है. राष्ट्रीयता और निवास की स्थिति के सत्यापन के लिए 30 से 90 दिनों की समयसीमा भी तय की गई है.
भारत और स्विट्जरलैंड परिवहन तकनीक, मोबिलिटी सिस्टम और बुनियादी ढांचे के क्षेत्र में भी सहयोग बढ़ाएंगे. इसके लिए भारत के सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय और स्विट्जरलैंड के फेडरल डिपार्टमेंट ऑफ इकोनॉमिक अफेयर्स, एजुकेशन एंड रिसर्च के बीच समझौता हुआ है. इस सहयोग के तहत टिकाऊ बुनियादी ढांचे के विकास पर जोर दिया जाएगा. इलेक्ट्रिक वाहन, रोपवे, सर्कुलर इकोनॉमी, सुरंगों और परिवहन से जुड़ी अन्य आधुनिक तकनीकों के क्षेत्र में दोनों देश मिलकर काम करेंगे.
विज्ञान और तकनीक के क्षेत्र में भी भारत-स्विट्जरलैंड सहयोग को नई दिशा देने की कोशिश की गई है. भारत के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग और स्विस नेशनल साइंस फाउंडेशन के बीच लेटर ऑफ इंटेंट पर सहमति बनी है. इसका उद्देश्य दोनों देशों के शोधकर्ताओं के बीच वैज्ञानिक सहयोग बढ़ाना, संयुक्त अनुसंधान के लिए साझेदारी विकसित करना और साझा प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में दीर्घकालिक वैज्ञानिक परियोजनाओं के लिए व्यापक ढांचा तैयार करना है.
भारत और स्विट्जरलैंड ने स्टार्टअप और उद्यमिता के क्षेत्र में भी सहयोग बढ़ाने की योजना बनाई है. विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग और ज्यूरिख यूनिवर्सिटी ऑफ एप्लाइड साइंसेज के बीच इनोवेशन, टेक्नोलॉजी ट्रांसफर और एंटरप्रेन्योरशिप को लेकर इम्प्लीमेंटेशन अरेंजमेंट तय किया गया है. इसके तहत शुरुआती चरण के स्टार्टअप के लिए इंडो-स्विस एकेडमिया-इंडस्ट्री ट्रेनिंग (AIT India) कार्यक्रम को आगे बढ़ाया जाएगा. इसमें दोनों देशों के बीच आदान-प्रदान, संयुक्त कार्यशालाएं, क्षमता निर्माण और नेटवर्किंग जैसी गतिविधियां शामिल होंगी.
दोनों देशों ने भारत-स्विस अनुसंधान सहयोग को और व्यापक बनाने के लिए एक नए फ्लैगशिप कार्यक्रम की शुरुआत की भी घोषणा की है. इसका उद्घाटन सत्र विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय के सहयोग से आयोजित किया जाएगा. इस पहल से शोधकर्ताओं, संस्थानों और उद्योगों के बीच सहयोग को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है.
ये समझौते ऐसे समय हुए हैं जब भारत और स्विट्जरलैंड अपने आर्थिक संबंधों को भी नई गति देने की कोशिश कर रहे हैं. यूरोपीय मुक्त व्यापार संघ (EFTA) के देशों में स्विट्जरलैंड भारत का सबसे बड़ा व्यापार और निवेश साझेदार है. स्विस राष्ट्रपति गाइ परमेलिन की 5 से 7 अक्टूबर तक की राजकीय यात्रा के दौरान दोनों देशों ने सहयोग के दायरे को व्यापक बनाने पर विशेष जोर दिया. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति परमेलिन ने सोमवार को नई दिल्ली में द्विपक्षीय वार्ता की. इस दौरान व्यापार, निवेश, विज्ञान, तकनीक, नवाचार, मोबिलिटी और लोगों के बीच संपर्क समेत कई मुद्दों पर चर्चा हुई.
भारत और स्विट्जरलैंड के बीच हुए ये समझौते संकेत देते हैं कि दोनों देशों के रिश्ते अब केवल व्यापार और निवेश तक सीमित नहीं रहेंगे. माइग्रेशन, युवा पेशेवरों, परिवहन तकनीक, वैज्ञानिक अनुसंधान और स्टार्टअप जैसे क्षेत्रों में बढ़ता सहयोग दोनों देशों के रिश्तों को व्यापक साझेदारी की दिशा में ले जा रहा है. आने वाले समय में इन पहलों के जरिए लोगों के बीच संपर्क, तकनीकी सहयोग, रिसर्च और इनोवेशन को और मजबूती मिलने की उम्मीद है.
भारत एक्सप्रेस
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