देश

ऊषा, लौट आओ! बंदूक की गूंज के बीच एक बूढ़ी मां की सिसकियां, भाई ने हाथ जोड़कर मांगी बहन की जिंदगी

Anti-Naxal Operation: लोकेश्वर सिन्हा/गरियाबंद: छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले के जंगलों से एक ऐसी खबर आई है जो दिल को झकझोर देती है. यह कहानी सिर्फ बंदूक और गोलियों की नहीं, बल्कि एक मां के इंतजार और एक भाई की बेबसी की है. आज गरियाबंद के घने जंगलों में जो सन्नाटा है, उसे गोलियों की गूंज नहीं, बल्कि एक मां की सिसकियां तोड़ रही हैं.

मां की पथराई आंखें और भाई की गुहार

तेलंगाना के एक छोटे से गांव सैंड्रावेली में एक कच्ची दीवार के सहारे बैठी मल्लाम की आंखें अब थक चुकी हैं. उनकी बेटी ऊषा (संगीता), जो आज नक्सली संगठन में 8 लाख की इनामी कमांडर (DVCM) बन चुकी है, मल्लाम के लिए आज भी वही छोटी सी बेटी है जो बरसों पहले घर से चली गई थी. ऊषा के भाई आबूला गंगैया ने नम आंखों और हाथ जोड़कर अपनी बहन से अपील की है कि वह वापस लौट आए. घर का आंगन सूना है और मां की ममता उसे पुकार रही है. परिवार को डर है कि अगर अब देर हुई, तो शायद फिर कभी मुलाकात न हो पाए.

“हमने नरक छोड़ दिया, तुम भी लौट आओ”

सिर्फ परिवार ही नहीं, बल्कि ऊषा के वो साथी भी अब उसे वापस बुला रहे हैं जो कभी उसके साथ जंगलों में मौत का खेल खेलते थे. हाल ही में आत्मसमर्पण करने वाले तीन बड़े नक्सली जानसी, सुनील और दीपक, जो खुद लाखों के इनामी थे, अब मुख्यधारा में लौट चुके हैं. उन्होंने एक सुर में कहा, “हमने नरक छोड़ दिया है और अब सुकून की जिंदगी जी रहे हैं. ऊषा, बलदेव, अंजू, ज्योति… तुम लोग भी लौट आओ. सरकार की पुनर्वास नीति का फायदा उठाओ, वरना बहुत देर हो जाएगी.”

आखिरी मौका और प्रशासन की डेडलाइन

गरियाबंद-नुवापाड़ा डिवीजन में सक्रिय इन चार बड़े नक्सलियों के लिए समय तेजी से निकलता जा रहा है. सुरक्षाबलों का घेरा लगातार छोटा होता जा रहा है और प्रशासन ने सरेंडर के लिए एक तरह की ‘डेडलाइन’ तय कर दी है. पुलिस का साफ संदेश है: या तो मुख्यधारा में शामिल होकर सम्मान से जियो, या फिर अंजाम भुगतने के लिए तैयार रहो.

क्या पिघलेगा पत्थर जैसा दिल?

यह लड़ाई अब सिर्फ विचारधारा की नहीं रह गई है, बल्कि एक परिवार के पुनर्मिलन की उम्मीद बन गई है. इनामी नक्सली बलदेव के परिवार ने भी साफ कह दिया है कि हथियारों का रास्ता सिर्फ बर्बादी की ओर जाता है. अब सवाल यह है कि क्या तेलंगाना से उठी एक मां की पुकार गरियाबंद के जंगलों की खामोशी को चीर पाएगी? क्या ऊषा और बलदेव अपनी बूढ़ी मां का सहारा बनने के लिए बंदूक छोड़ेंगे?

ये भी पढ़ें: हार के बाद तेजस्वी यादव की नई ताजपोशी! अब कौन सी जिम्मेदारी मिलने वाली है?

-भारत एक्सप्रेस

Vaibhav Gupta

Recent Posts

‘ईश्वर अल्लाह तेरो नाम!’ नंगे पैर, हाथ में लाठी… दंगों की आग के बीच अकेले कैसे लड़े बापू? पढ़िए अनकही दास्तान

Pushpamitra Book Review: 'गांधी का सैंतालीस' केवल इतिहास का रोजनामा नहीं, बल्कि बंटवारे की त्रासदी…

12 minutes ago

बाउंड्री पर बैठे थे, अचानक दौड़े और लगा दी छलांग; प्रेमानंद महाराज के शिष्य की मौत का CCTV आया सामने

Premanand Maharaj Disciple Death: वृंदावन में प्रेमानंद महाराज के शिष्य दीपक लोधी उर्फ रसिक दुलारी…

29 minutes ago

‘मां से बहस की ऐसी सजा?’ लखनऊ के विजन अपार्टमेंट में कलियुगी बेटे का खूनी खेल, वजह जान कांप जाएगी रूह

Lucknow News: लखनऊ के विजन अपार्टमेंट में मामूली विवाद के बाद 17 वर्षीय नाबालिग बेटे…

35 minutes ago

त्योहारों पर घर जाने वालों के लिए रेलवे की तैयारी, चलेंगी सात जोड़ी स्पेशल ट्रेनें; प्लेटफॉर्म टिकट होगा दोगुना

दुर्गापूजा, दीपावली और छठ के दौरान यात्रियों की सुविधा के लिए रांची रेल मंडल सात…

1 hour ago

‘1 साल से बिना वेतन काम कराना शोषण, 12 तक दें सैलरी!’: SHUATS कर्मचारियों के हक में हाईकोर्ट का सख्त आदेश

Allahabad High Court: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने शुआट्स के शिक्षकों और शिक्षणेत्तर कर्मचारियों के बकाया वेतन…

1 hour ago

हिंदुस्तान का किसान उठ खड़ा हुआ! जानिए शास्त्री जयंती पर पीएम मोदी ने पूर्व प्रधानमंत्री के लिए क्या कहा?

PM Narendra Modi Tribute: लाल बहादुर शास्त्री की जयंती पर पीएम मोदी ने उन्हें श्रद्धांजलि…

1 hour ago