Nitish Kumar first & last cabinet meeting
Nitish Kumar first & last cabinet meeting: बिहार में आज (14 अप्रैल) का दिन राजनीतिक दृष्टिकोण से काफी महत्वपूर्ण है. लगभग 20 वर्ष से बिहार की सत्ता पर काबिज नीतीश कुमार (Nitish Kumar) ने मंगलवार को राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल सैयद अता हसनैन को अपना इस्तीफा सौंप दिया है (Nitish Kumar resignation). इससे पहले आज नीतीश कुमार की सरकार ने अपनी आखिरी कैबिनेट बैठक की. हालांकि, नीतीश कुमार के राज में 4 नवंबर 2005 और 14 अप्रैल 2026 ये वो दो तारीखें हैं, जब नीतीश की कैबिनेट ने अपनी पहली और आखिरी बैठक की. आइए जानते हैं नीतीश कुमार की आखिरी और पहली बैठक में क्या-क्या हुआ.
साल 2005 के बिहार विधानसभा चुनाव दो बार हुए थे. पहली बार फरवरी 2005 में किसी भी पार्टी को स्पष्ट बहुमत नहीं मिली. इसके बाद उसी वर्ष अक्टूबर-नवंबर में फिर से चुनाव हुआ, जिसमें एनडीए गठबंधन की पार्टियों बीजेपी और जेडीयू को जीत मिली. इस जीत के साथ नीतीश कुमार ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली. यह बिहार के लिए सिर्फ एक नई शुरुआत नहीं थी, बल्कि लालू-राबड़ी के 15 सालों के ‘जंगलराज’ पर बड़ी जीत थी.
नीतीश कुमार जब सत्ता में आए, तो उन्होंने शुरुआत से ही सुशासन को सबसे अहम मुद्दा बनाया. 25 नवंबर को हुई अपनी पहली कैबिनेट बैठक में उन्होंने साफ संदेश दिया कि सरकार का मुख्य लक्ष्य बेहतर प्रशासन होगा. उस समय बिहार में अपराध काफी बढ़ चुका था. लालू-राबड़ी के 15 साल के शासन के बाद अपहरण, हत्या, भ्रष्टाचार और जमीन से जुड़े विवाद आम बात बन गए थे.
नीतीश कुमार ने कहा कि ज्यादातर अपराधों की जड़ जमीन के झगड़े हैं. इसलिए उन्होंने सभी जिलाधिकारियों को निर्देश दिया कि जमीन से जुड़े मामलों को जल्दी निपटाने के लिए विशेष कैंप लगाए जाएं और लोगों की समस्याओं का समाधान प्राथमिकता के आधार पर किया जाए. उन्होंने कानून-व्यवस्था सुधारने, सड़कों और बिजली की स्थिति बेहतर करने और प्रशासन को मजबूत बनाने पर खास ध्यान देने की बात कही. इसके साथ ही मंत्रियों के बीच विभागों का बंटवारा किया गया और उपमुख्यमंत्री को वित्त से जुड़ी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां सौंपी गईं. नई विधानसभा का सत्र बुलाने की तैयारी भी शुरू कर दी गई.
बिहार में लगभग 20 वर्ष का नीतीश युग अब खत्म हो चुका है. सुशासन बाबू के नाम से जानने वाले नेता नीतीश कुमार ने राज्य में कानून-व्यवस्था पर खास नित्रंडन रखा है. 20 साल के अपने सफर में नीतीश कुमार ने कई बार पाला बदला लेकिन हमेशा से कुर्सी उनके खरीब बनी रही. इसके चलते उनके विरोधियों ने ‘पलटू राम’ का नाम भी मिला.
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14 अप्रैल 2026 को हुई नीतीश कुमार की आखिरी कैबिनेट बैठक में किसी नई विकास योजना पर फैसला नहीं लिया गया. इस बैठक का मुख्य उद्देश्य सरकार को खत्म करने की प्रक्रिया को आगे बढ़ाना था. कैबिनेट ने एकमत से सरकार भंग करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी, जिससे संवैधानिक नियमों के तहत मुख्यमंत्री राज्यपाल को अपना इस्तीफा दे सकें.
-भारत एक्सप्रेस
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