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मजदूरों के लिए ‘गेम चेंजर’ साबित होंगे नए नियम: 12 घंटे की शिफ्ट पर 3 दिन की छुट्टी और ओवरटाइम का डबल पैसा

नए नियमों के तहत सप्ताह में अधिकतम 48 घंटे काम की सीमा तय है, जबकि 12 घंटे की शिफ्ट के साथ ज्यादा छुट्टियां दी जा सकती हैं.ओवरटाइम पर दोगुना वेतन, 180 दिन में पेड लीव और गिग वर्कर्स को सामाजिक सुरक्षा जैसे प्रावधान मजदूरों के अधिकारों को मजबूत बनाते हैं.साथ ही, कर्मचारियों को शांतिपूर्ण विरोध और त्वरित न्याय का अधिकार भी दिया गया है. चलिए जानते है पूरा मामला:

मजदूरों के लिए कई अहम बदलाव

भारत में 1 अप्रैल 2026 से लागू हुए नए लेबर कोड ने मजदूरों और कामकाजी वर्ग के लिए कई अहम बदलाव किए हैं. इन नियमों का मकसद श्रम कानूनों को आसान बनाना और कर्मचारियों के अधिकारों को मजबूत करना है. खासतौर पर औद्योगिक क्षेत्रों में चल रहे विरोध प्रदर्शनों के बीच इन प्रावधानों को समझना जरूरी हो गया है.

नया कोड काम के घंटे, वेतन, छुट्टियों और सामाजिक सुरक्षा जैसे अहम पहलुओं को नए ढंग से परिभाषित करता है.

तीन दिन की छुट्टी मिलना अनिवार्य

नए नियमों के तहत कंपनियों को काम के घंटों में लचीलापन दिया गया है. अब 12 घंटे की शिफ्ट लागू की जा सकती है, लेकिन सप्ताह में कुल काम 48 घंटे से ज्यादा नहीं होगा. इसका सीधा मतलब है कि अगर कर्मचारी 12 घंटे काम करता है तो उसे सप्ताह में तीन दिन की छुट्टी मिलेगी. साथ ही लगातार 5 घंटे काम के बाद कम से कम आधे घंटे का ब्रेक देना अनिवार्य कर दिया गया है, ताकि कर्मचारियों को पर्याप्त आराम मिल सके.

सात दिनों के भीतर वेतन देना अनिवार्य

ओवरटाइम और वेतन से जुड़े नियमों में भी बड़ा बदलाव किया गया है. अब 15 मिनट से ज्यादा अतिरिक्त काम को ओवरटाइम माना जाएगा और इसके लिए दोगुना भुगतान करना होगा. इसके अलावा बेसिक सैलरी को कुल CTC का कम से कम 50 प्रतिशत रखना जरूरी है, जिससे पीएफ और ग्रेच्युटी जैसी सुविधाएं बढ़ेंगी. कंपनियों को महीने के अंत के सात दिनों के भीतर वेतन देना भी अनिवार्य किया गया है.

छुट्टियों और सामाजिक सुरक्षा में बदलाव

छुट्टियों और सामाजिक सुरक्षा को लेकर भी नियम पहले से ज्यादा मजबूत किए गए हैं. अब 180 दिन काम करने पर ही कर्मचारी पेड लीव के हकदार होंगे. गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर्स को भी पहली बार सामाजिक सुरक्षा में शामिल किया गया है. महिला कर्मचारियों के लिए नाइट शिफ्ट में सुरक्षा और सहमति जरूरी है.

नियमों के उल्लंघन पर कर्मचारी शिकायत कर सकते हैं और 45 दिनों में समाधान का प्रावधान है, साथ ही शांतिपूर्ण विरोध का अधिकार भी सुरक्षित रखा गया है.

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-भारत एक्सप्रेस

Shubhra Rai

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