पीएम स्वनिधि योजना का विस्तार
झPM Modi Cabinet Decision: कोरोना महामारी के मुश्किल दौर में लाखों रेहड़ी-पटरी वालों की आजीविका पर संकट आ गया था. उसी समय पीएम मोदी की सरकार ने पीएम स्वनिधि योजना की शुरुआत कर उन्हें सहारा दिया था. इस योजना ने सिर्फ आर्थिक मदद से आगे बढ़कर स्ट्रीट वेंडर्स की जिंदगी में एक नई क्रांति ला दी है. अब मोदी कैबिनेट ने इस योजना को 31 मार्च, 2030 तक बढ़ाने का ऐतिहासिक फैसला (PM SVANidhi Scheme Extension) लिया है. यह सिर्फ योजना के अवधि का विस्तार नहीं है, बल्कि एक व्यापक बदलाव है, जिसका लक्ष्य 1.15 करोड़ से अधिक रेहड़ी-पटरी वालों को सशक्त बनाना है.
गणेश चतुर्थी पर हुए इस फैसले के बाद अब स्ट्रीट वेंडर्स को न सिर्फ ज्यादा लोन मिलेगा, बल्कि उन्हें डिजिटल दुनिया से जोड़ने के लिए यूपीआई-लिंक्ड क्रेडिट कार्ड जैसी आधुनिक सुविधाएं भी मिलेंगी. आइये जाने क्या है फैसला और इससे क्या लाभ होंगे.
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पुनर्गठित योजना का लक्ष्य 50 लाख नए लाभार्थियों सहित 1.15 करोड़ लाभार्थियों को लाभ देना है. इस योजना के कार्यान्वयन की जिम्मेदारी, आवास एवं शहरी मंत्रालय और वित्तीय सेवा विभाग (डीएफएस) पर संयुक्त रूप से रहेगी. इसमें डीएफएस की भूमिका, बैंकों/वित्तीय संस्थानों और उनके जमीनी स्तर के अधिकारियों के माध्यम से ऋण/क्रेडिट कार्ड तक पहुंच को सुविधाजनक बनाने की रहेगी.
यूपीआई-लिंक्ड रुपे क्रेडिट कार्ड की शुरुआत से स्ट्रीट वेंडरों को किसी भी आकस्मिक व्यावसायिक और व्यक्तिगत आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए तत्काल ऋण उपलब्ध हो सकेगा. इसके अलावा, डिजिटल प्रणाली को बढ़ावा देने के लिए, स्ट्रीट वेंडर खुदरा और थोक लेनदेन करने पर 1,600 रुपए तक के कैशबैक प्रोत्साहन का लाभ उठा सकते हैं.
इस योजना का दायरा चरणबद्ध तरीके से जनगणना कस्बों व अर्ध-शहरी क्षेत्रों आदि बढ़ाया जा रहा है. यह योजना उद्यमिता, वित्तीय साक्षरता और डिजिटल कौशल के माध्यम से विपणन पर ध्यान केंद्रित करते हुए रेहड़ी-पटरी वालों की क्षमता निर्माण पर भी ध्यान देती है. भारतीय खाद्य संरक्षा एवं मानक प्राधिकरण के सहयोग से रेहड़ी-पटरी वालों के लिए मानक स्वच्छता और खाद्य सुरक्षा प्रशिक्षण आयोजित किए जाएंगे.
पीएम स्वनिधि योजना का यह विस्तार सरकार की दूरदर्शिता को दर्शाता है, जिसका लक्ष्य छोटे से छोटे व्यापारी को भी आर्थिक सुरक्षा और सम्मान देना है. बढ़ी हुई ऋण राशि और यूपीआई क्रेडिट कार्ड जैसी सुविधाओं से वे न केवल अपने व्यवसाय को बढ़ा पाएंगे, बल्कि डिजिटल अर्थव्यवस्था का हिस्सा भी बन सकेंगे. यह योजना उन्हें सिर्फ एक कामगार के रूप में नहीं, बल्कि अर्थव्यवस्था के एक महत्वपूर्ण हिस्से के रूप में पहचान देती है. इससे समावेशी विकास को बढ़ावा मिलेगा, जिससे शहरी क्षेत्रों में एक नया आत्मविश्वास और आर्थिक गतिशीलता आएगी.
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