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‘कूटनीति सिर्फ राजनयिक दायरे तक न रहे..!’ 2025 बैच के IFS अधिकारियों से मुलाकात पर बोले पीएम मोदी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारतीय विदेश सेवा (IFS) के 2025 बैच के युवा अधिकारी प्रशिक्षुओं के साथ एक बेहद महत्वपूर्ण और मार्गदर्शक संवाद किया. इस दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने युवा राजनयिकों को भारत की बदलती विदेश नीति, वैश्विक पटल पर देश की बढ़ती धाक और ‘विकसित भारत 2047’ के संकल्प को ध्यान में रखते हुए काम करने की प्रेरणा दी.

पीएम मोदी ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि 21वीं सदी की कूटनीति अब केवल पारंपरिक कूटनीतिक दायरों या बंद कमरों तक सीमित नहीं रह सकती, बल्कि इसे आर्थिक अवसरों, नागरिक सेवा और सभ्यतागत विरासत से जोड़ना होगा.

‘प्रवासी भारतीयों से जुड़ें और निवेश के उत्प्रेरक बनें’

प्रधानमंत्री मोदी ने युवा IFS अधिकारियों से आग्रह किया कि वे विदेशों में अपनी तैनाती के दौरान स्थानीय समुदायों और भारतीय प्रवासियों (Indian Diaspora) के साथ सार्थक और सीधा जुड़ाव स्थापित करें. उन्होंने कहा कि आज का भारत वैश्विक आर्थिक महाशक्ति बनने की राह पर है, इसलिए हमारे राजनयिकों को केवल कूटनीतिक बैठकों तक सीमित न रहकर भारत के आर्थिक हितों को साधने में उत्प्रेरक (Catalyst) की भूमिका निभानी होगी.

पीएम मोदी ने युवा अफसरों को निर्देश दिया कि वे दुनिया भर में भारत के लिए नए व्यापार और निवेश के अवसरों की पहचान करें और उन्हें धरातल पर उतारने में मदद करें.

 

एम्बेसी और मिशनों को टेक-फ्रेंडली बनाने का आह्वान

प्रधानमंत्री ने दुनिया भर में मौजूद भारतीय दूतावासों और मिशनों के कामकाज में बड़ा बदलाव लाने पर जोर दिया. उन्होंने कहा कि हमारे सभी विदेशी मिशनों को अधिक तकनीक-आधारित (Tech-driven), पारदर्शी और नागरिक-केंद्रित बनाया जाना चाहिए.

पीएम ने अधिकारियों से कहा कि विदेशों में रहने वाले भारतीय नागरिकों को किसी भी आपात स्थिति या आवश्यकता के समय निर्बाध, त्वरित और उत्तरदायी काउंसलर सेवाएं (Consular Services) मिलनी चाहिए. साथ ही, उन्होंने भारतीय दूतावासों की डिजिटल उपस्थिति (Digital Presence) को और अधिक मजबूत करने का आह्वान किया.

संस्कृति को कूटनीति का जरिया बनाने पर जोर

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने युवा राजनयिकों को भारत के ‘सॉफ्ट पावर’ (Soft Power) को दुनिया के कोने-कोने तक पहुंचाने की बड़ी जिम्मेदारी सौंपी. उन्होंने कहा कि अधिकारियों को भारत की हज़ारों साल पुरानी सभ्यतागत विरासत, समृद्ध सांस्कृतिक धरोहर, कला और विशाल पर्यटन क्षमता को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करना चाहिए.

इसके अलावा प्रधानमंत्री ने विश्वास जताया कि 2025 बैच के ये युवा अधिकारी अपनी ऊर्जा, आधुनिक सोच और समर्पण के बल पर वैश्विक मंच पर भारत की भूमिका को और अधिक सशक्त और समावेशी बनाएंगे.

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-भारत एक्सप्रेस

Rohit Agrawal

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